श्रवण मावई
सीहोर । अब तक नकली नोटों के जरिए असली नोट बनाने वाले गिरोह ने अब नकली बैंक ड्राफ्ट बनाने शुरू कर दिए हैं इस कारोबार का खुलासा तीन व्यापारियों को थमाएं गए डेढ़ लाख रूपए के बैंक ड्राफ्ट से हुआ है। यह सभी बैंक ड्राफ्ट बैंक आॅफ बड़ोदा से बनवाएं गए हैं और प्रदेश भर की अनेक बैंकों में इन नकली बैंक ड्राफ्ट होने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही है।
26 जनवरी के ठीक पहले सीहोर के सदगुरू इलेक्ट्रिकल्स पर अपने आप को देवास निवासी ओमप्रकाश तिवारी बताते हुए एक व्यक्ति ने 50 हजार रूपये का कोटेशन मांगा और 50 हजार रूपये का बैंक ड्राफ्ट देते हुए कहा कि वह माल सिर्फ 10 हजार रूपये का लेगा और 40 हजार रूपये नगद इसकी एवज में दुकानदार को 2 प्रतिशत कमीशन देगा। सदगुरू इलेक्ट्रिनक के संचालक राजेन्द्र गुप्ता ने 2 प्रतिशत कमीशन प्राप्त करने के लिए सहज भाव में डीडी स्वीकार कर लिया और उन्होंने दूसरे दिन यह डीडी बैंक आॅफ बड़ोदा में प्रस्तुत किया जब यह डीडी केश होने के लिए पहुंचा तो अधिकारी के होश उड़ गए यह डीडी नकली था। लंबी जांच के बाद राजेन्द्र गुप्ता को इसकी जानकारी दी गई कि उनके द्वारा प्रस्तुत किया गया डीडी नकली है। इसी तरह इस ओमप्रकाश तिवारी नामक व्यक्ति ने महालक्ष्मी रेडीमेड के संचालक जितेन्द्र महेश्वरी, बुरहानी किराना को 50-50 हजार रूपये का बैंक ड्राफ्ट दिया और इनसे 2 हजार रूपये लिये। जिन्हें बाद में समायोजन के लिए कहकर चला गया। इन दोनों व्यापारियों ने जब राजेन्द्र गुप्ता की कहानी सुनी तो उन्होंने भी अपने बैंक ड्राफ्ट दिखाये तब पता चला कि यहां दोनों बैंक ड्राफ्ट भी नकली है।
बैंक परेशानी में
बैंक आॅफ बड़ोदा की देवास शाखा से जारी हुए यह बैंक ड्राफ्ट सीहोर शाखा के लिए मुसीबत बन गए हैं, चूंकि पुलिस बैंक प्रबंधक को फरियादी बनाने के बाद धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज करेगी।
मामले को हल्के में ले रही पुलिस
नकली बैंक ड्राफ्ट के इस मामले को पुलिस बहुत हल्के में ले रही है इस मामले को तीन दिन हो गए हैं लेकिन पुलिस ने आरोपी को ढूंढने के प्रयास नहीं किए जबकि यह मामला न केवल गंभीर है, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा है यदि यह नकली बैंक ड्राफ्ट बड़ी संख्या में बनाए गए हैं तो इन्हें और किन शहरों में चलाया जा रहा है इसमें कितना बड़ा गिरोह काम कर रहा है और बैंक में इस समय कितने नकली बैंक ड्राफ्ट पहुंच चुके हैं। यह सब बिन्दु जांच का विषय है। इस मामले में बैंक आॅफ बड़ोदा के प्रबंधक अपनी और से कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। उन्होंने पुलिस का हवाला दिया है।
इनका कहना है
बैंक आॅफ बड़ोदा के बैंक प्रबंधक को बुलाया गया है वह आ जाते हैं तो धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया जाएगा।
सतीश मेहलवाला, टीआई कोतवाली
सीहोर । अब तक नकली नोटों के जरिए असली नोट बनाने वाले गिरोह ने अब नकली बैंक ड्राफ्ट बनाने शुरू कर दिए हैं इस कारोबार का खुलासा तीन व्यापारियों को थमाएं गए डेढ़ लाख रूपए के बैंक ड्राफ्ट से हुआ है। यह सभी बैंक ड्राफ्ट बैंक आॅफ बड़ोदा से बनवाएं गए हैं और प्रदेश भर की अनेक बैंकों में इन नकली बैंक ड्राफ्ट होने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही है।
26 जनवरी के ठीक पहले सीहोर के सदगुरू इलेक्ट्रिकल्स पर अपने आप को देवास निवासी ओमप्रकाश तिवारी बताते हुए एक व्यक्ति ने 50 हजार रूपये का कोटेशन मांगा और 50 हजार रूपये का बैंक ड्राफ्ट देते हुए कहा कि वह माल सिर्फ 10 हजार रूपये का लेगा और 40 हजार रूपये नगद इसकी एवज में दुकानदार को 2 प्रतिशत कमीशन देगा। सदगुरू इलेक्ट्रिनक के संचालक राजेन्द्र गुप्ता ने 2 प्रतिशत कमीशन प्राप्त करने के लिए सहज भाव में डीडी स्वीकार कर लिया और उन्होंने दूसरे दिन यह डीडी बैंक आॅफ बड़ोदा में प्रस्तुत किया जब यह डीडी केश होने के लिए पहुंचा तो अधिकारी के होश उड़ गए यह डीडी नकली था। लंबी जांच के बाद राजेन्द्र गुप्ता को इसकी जानकारी दी गई कि उनके द्वारा प्रस्तुत किया गया डीडी नकली है। इसी तरह इस ओमप्रकाश तिवारी नामक व्यक्ति ने महालक्ष्मी रेडीमेड के संचालक जितेन्द्र महेश्वरी, बुरहानी किराना को 50-50 हजार रूपये का बैंक ड्राफ्ट दिया और इनसे 2 हजार रूपये लिये। जिन्हें बाद में समायोजन के लिए कहकर चला गया। इन दोनों व्यापारियों ने जब राजेन्द्र गुप्ता की कहानी सुनी तो उन्होंने भी अपने बैंक ड्राफ्ट दिखाये तब पता चला कि यहां दोनों बैंक ड्राफ्ट भी नकली है।
बैंक परेशानी में
बैंक आॅफ बड़ोदा की देवास शाखा से जारी हुए यह बैंक ड्राफ्ट सीहोर शाखा के लिए मुसीबत बन गए हैं, चूंकि पुलिस बैंक प्रबंधक को फरियादी बनाने के बाद धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज करेगी।
मामले को हल्के में ले रही पुलिस
नकली बैंक ड्राफ्ट के इस मामले को पुलिस बहुत हल्के में ले रही है इस मामले को तीन दिन हो गए हैं लेकिन पुलिस ने आरोपी को ढूंढने के प्रयास नहीं किए जबकि यह मामला न केवल गंभीर है, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा है यदि यह नकली बैंक ड्राफ्ट बड़ी संख्या में बनाए गए हैं तो इन्हें और किन शहरों में चलाया जा रहा है इसमें कितना बड़ा गिरोह काम कर रहा है और बैंक में इस समय कितने नकली बैंक ड्राफ्ट पहुंच चुके हैं। यह सब बिन्दु जांच का विषय है। इस मामले में बैंक आॅफ बड़ोदा के प्रबंधक अपनी और से कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। उन्होंने पुलिस का हवाला दिया है।
इनका कहना है
बैंक आॅफ बड़ोदा के बैंक प्रबंधक को बुलाया गया है वह आ जाते हैं तो धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया जाएगा।
सतीश मेहलवाला, टीआई कोतवाली








