सीहोर। सरकारी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत धारा 17 का उल्लघंन बैखोफ जारी है। इस अधिनियम के तहत बच्चों को शारीरिक और मानसिक प्रताडऩा नहीं दी जा सकती लेकिन इछावर तहसील क्षेत्र के स्कूलों में पदस्थ शिक्षक इस धारा का उल्लघंन भी करने से बाज नहीं आ रहे हैं बीते एक पखवाड़े में दो अलग-अलग स्कूलों में होमवर्क को लेकर बच्चों से मारपीट की गई।
ताजे मामले में गुरूवार को ग्राम दीवडिय़ा के माध्यमिक कन्या स्कूल में कक्षा आठवी में पढऩे वाली छात्रा उषा को शिक्षिका गंजना मडलोई ने इतनी उठ्ठक बैठक लगवाई कि उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे गंभीर अवस्था में उसे अस्पताल रेफर करना पड़ा। छात्रा का कसूर इतना था कि उसने शिक्षिका द्वारा दिए गए होमवर्क पूर्ण नहीें किया था। इसी से नाराज होकर शिक्षिका ने सजा के तौर पर छात्रा से लगभग दौ सौ उठ्ठक बैठक लगवाई जिससे उसकी हालत खराब हो गई। बताया जाता है कि छात्रा के पेट में जोरदार दर्द उठा उसे तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया जहां डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। हालांकि इस मामले में छात्रा के परिजनों ने पुलिस को शिकायत नहीं की है लेकिन छात्रा के स्वस्थ्य होने के बाद मामले की शिकायत करेंगे।
दूसरा मामला जांच में
लगभग एक पखवाड़ा पहले इछावर तहसील क्षेत्र के ही गांव में एक शिक्षक ने एक छात्र को इतनी बुरा तरह पीटा कि उसे हाथ की अंगुलियां ही टूट गई इस मामले में छात्र के पिता ने इछावर थाने में शिकायत की थी लेकिन मामले में आवेदन लेकर जांच की जा रही है। पन्द्रह बीत जाने के बाद भी जांच ज्यों की त्यों है।
क्या है अधिनियम
स्कूलों में बच्चों को शारीरिक व मानसिक प्रताडऩा नहीं दिए जाने को लेकर सरकार तक सख्त है इसी के मद्दे नजर शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाया गया इस अधिनियम की धारा 17 में यह प्रावधान है कि स्कूल में पदस्थ शिक्षक किसी भी बच्चे को शारीरिक या मानसिक प्रताडऩा नहीं दे सकते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।







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