



श्रवण मावई
भोपाल/सीहोर। राजस्थान में यदि संगीत लोगों के खून में हैं तो मध्यप्रदेश के लोगों के दिल में संगीत बसता है यहां के लोग कलाकार की भावना को समझते हैं और उसकी कद्र करते हैं। मुझे यहां से बहुत प्यार मिला है। यह बात इंडियन आइडिल-5 के टॉप थ्री में रहे स्वरूप खान ने प्रदेश टुडे को दिए साक्षात्कार में कहीं।
राजस्थान के जैसलमेर जिले के छोटे से गांव बईया में जन्म लेने वाले बीस वर्षीय इस कलाकार की आवाज का जादू पूरे देश में चल रहा है लेकिन इनकी सहजता इन्हें और बढ़ा कलाकार बनाती है। सिर पर पगड़ी और मन में राजस्थानी लोक गीत को अपनी पहचान बताने वाले स्वरूप खान अपने को स्वरूप मंगयार कहलाना पसंद करते हैं। चूंकि मंगलयार उनकी समाज का नाम है। दरअसल स्वरूप खान एक कार्यक्रम में शामिल होने शनिवार को भोपाल और सीहोर आए थे।
मध्यप्रदेश ने बहुत प्यार दिया
स्वरूप बताते हैं कि मध्यप्रदेश ने इंडियल आइडिल के दौरान उन्हें बहुत प्यार दिया राजस्थान के अलावा उन्हें मध्यप्रदेश से भी अधिक वोट मिले जिसकी बदोलत वे टॉप थ्री तक पहुंचे। े संगीत के लिए अच्छी जगह
स्वरूप मंगलयार का मानना है कि भोपाल और सीहोर ऐसी जगह है जहां पर अच्छा संगीत बनाया जा सके। इस बात से उनका आशय यह है कि भोपाल का ताल और सुंदरता में अच्छा संगीत बनाने का माहौल है। साथ ही सीहोर में शांति है और ये दोनों ही परिस्थितियां संगीत को जन्म देने के लिए पर्याप्त है। न पढऩे का दुख
युवाओं के बीच लोक प्रिय स्वरूप खान को आज न पढऩे का दुख है वे बताते हैं कि वह केवल चौथी कक्षा तक पढ़े हैं। उन्हें इंग्लिश बात करने में परेशानी आती है, लेकिन वे चाहते हैं कि राजस्थान के बच्चें पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दे खास तौर पर उनके समाज के बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा जोर देते हैं।
भगवान है संगीत
जैसे कि मेरे लिए मां बाप भगवान तुल्य है ठीक वैसे ही संगीत मेरे लिए भगवान है और में केवल उनकी आराधना करता हूं।
फोक तो बजेगा ही
कोलाबेरी जैसे गीत को लेकर स्वरूप खान का कहना है कि आजकल धूम धड़ाके वाले गाने पसंद किए जा रहे हैं लेकिन वह फोक जिंदा रखना चाहते हैं और असली संगीत फोक ही है इसलिए चाहे पार्टी पॉप की हो पर वह उनके कार्यक्रम की शुरूआत फोक गीत से ही करते हैं।
सलमान के लिए गाऊं
फिल्मी गानें गाने में मजा भी आ रहा है लेकिन इच्छा है कि सलमान खान के लिए गाऊं मुझे वह बहुत पसंद है।
कलाकार बराबर
फिल्म इंडस्ट्री में कलाकार सब बराबर है में छोटे से गांव से हूं बावजूद इसके मुझे बड़े कलाकार काफी सम्मान देते हैं। वह के लोग कला को देखते हैं न कि शहर, जात-पात या औहदा।
पसंदीदा गानें
स्वरूप खान किसी भी कार्यक्रम में दो गीत अवश्य गाते हैं सुफियाना अंदाज का ख्वाजा मेरे ख्वाजा और राजस्थान का लोकगीत केसरिया बालम, उनका कहना है कि कार्यक्रम में चाहे कैसे भी श्रोता हो लेकिन यह दोनों ही गीत सबको भाते हैं ओर दोनों मेरे दिल के करीब है।
अच्छा लगता है अपनी पहचान होना
स्वरूप कहते हैं कि पहले पहचानें नहीं थी लेकिन अब सब जानते पहचानते हैं अच्छा लगता है जब मेरे माता पिता को मेरे नाम से लोग पहचानते है ।
मन भावे माहरो हिरदेश...
स्वरूप जिस गांव में रहते हैं वह के लोग जजमानों के लिए गाते हैं जजमान का जो नाम होता है वहीं नाम पर वह उसी समय गीत बनाते हैं और सुनने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। ठीक वैसे ही उन्होंने प्रदेश टुडे के सीएमडी हिरदेश दीक्षित के लिए गीत गाया मन भावे रे बड़ा प्यार लागे रे माहरो हिरदेश, मन भावे रे तारे चांद लागे रे माहरो हिरदेश...







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