गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

किसी को नहीं मालूम कितनी कंपनियां आर्थिक लेनदेन में लगी? पुलिस और प्रशासन के पास नहीं है कंपनियों की सूची

आष्टा। आम आदमी के लखपति बनने की चाहत ने न केवल ऐसी कंपनियों को जन्म दिया जो रातोरात लखपति बनाने का दावा करती है, बल्कि अनेक बेरोजगारों को लुभावने अवसर बताते हुए उनके संपर्क और संबंधों से अपनी तिजौरी भर ली और मौका आने पर चलते बनें। ऐसी कई कंपनियां इस तहसील में आई और चली गई। कुछ के खिलाफ मामले दर्ज हुए तो कुछ की शिकायतें सिफारिश के आगे दबकर रह गई। आर्थिक अपराध की श्रेणी में आने वाली इन घटनाओं को लेकर जहां प्रशासन मौन है, वहीं पुलिस भी चुप्पी साधे हुए है। ऐसी स्थिति में ऐसी कंपनियां मौके का फायदा उठाकर विलोपित हो रही है। शहर के सर्वाधिक व्यस्त मार्ग कन्नौद रोड़ पर ऐसी कई कंपनियों के कार्यालय है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस के पास न तो इनकी जानकारियां है और ना ही सूचियां और फिर गांव की स्थिति तो और अधिक खतरनाक है। लखपति बनने और बनाने का दावा करने वाली एक कंपनी के लोगों की गिरफ्तारी से मामला फिर गरमा गया है। हजारों रूपए लेकर दो, पांच, दस और बीस रूपए के चेक भेजने वाली इस कंपनी को लेकर अब मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता जा रहा है। इस तहसील के अनेक गांवों में और तहसील मुख्यालयों पर इस तरह की कंपनियां कार्यरत है, जिनके संबंध में जनसामान्य की बात तो दूर खुद पुलिस और प्रशासन को भी जानकारी नही है। इसी के चलते लालच के वशीभूत होकर अनेक लोग लुभावने वादे और दावे के शिकार होकर अपनी जमा पूंजी गवां बैठे है। स्थानीय युवकों के माध्यम से तहसील से लेकर गांव तक अपनी पेठ जमाने वाली यह कंपनियां खतरा भापते ही रातोरात भाग खड़ी होती है। शेष बचते है तो सिर्फ स्थानीय युवक और लुटेपिटे लोग। कुल मिलाकर लालच के इस खेल में जहां नागरिक लखपति बनने के चक्कर में शामिल हो रहे है, तो होशियार लोग कंपनी बनाकर लालचियों को अपने जाल में फंसाकर खुद जरूर लखपति बन जाते है।

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