बुधवार, 4 जनवरी 2012

पुलिस की गले की हड्डी बना मृतक बाबूलाल

सीहोर।
अब से 11 वर्ष पूर्व इछावर थाना क्षेत्र में पुलिस की पिटाई से हुई एक ग्रामीण की मौत के मामले में पुलिस खात्मा लगाने का मन बना चुकी है। इस मामले में रिपोर्ट आईजी एजेके को भेजी गई है। वह से स्वीकृति मिलने के बाद संभवत: खात्मा लगाया जा सकता है, लेकिन 11 साल के अंतराल में पुलिस मामले में चालान पेश नहीं कर सकी है। यह मामला पुलिस के लिए गले की हड्डी बन हुआ है। चूंकि यदि चालान पेश करते हैं तो विवेचक सही आलाधिकारी जेल जा सकते हैं वहीं मानव अधिकार आयोग चालान पेश करने के लिए लगातार रिमांडर भेज रहा है।
गौरतलब है कि सन 2000 में इछावर थाने में अवैध रूप से शराब रखने के आरोप में ग्राम दुदलई निवासी बाबूलाल पुत्र मांगीलाल मोंगिया को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई जिससे उसके शरीर में गंभीर चौंटे आई। एक हफ्ते के बाद वह सीहोर और फिर भोपाल हमीदिया अस्पताल में भर्ती हुआ जहां उसकी मौत हो गई। उसकी पीएम रिपोर्ट में मौत का कारण एक हफ्ते पहले की गई पिटाई से आई चौटें बताया गया। इसी आधार पर पहले पुलिस ने 4 पुलिस कर्मी प्रधान आरक्षक महेश यादव, आरक्षक ओमप्रकाश यादव, आरक्षक गजराज सिंह और सैनिक जमना प्रसाद के खिलाफ धारा 304 ए के तहत मामला दर्ज किया गया। लेकिन मृतक बाबूलाल की पत्नी और उसका परिवार पुलिस की इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं था। मृतक की पत्नी तेजू बाई ने मानव अधिकार आयोग में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई मामले को संज्ञान में लेते हुए आयोग ने पीएम रिपोर्ट को आधार मानते हुए पुलिस को धारा 302 तथा एससीएसटी एक्ट के तहत पुलिस कर्मी के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। पुलिस ने निर्देश का पालन करते हुए मामला दर्ज भी कर लिया। लेकिन कुछ समय बाद ही कोर्ट में पुलिस ने खात्मा प्रस्तुत कर दिया इस दौरान फरियादी तेजूबाई ने कोर्ट में बयान पलट दिए और कहा कि उसका पति काम करने गया था। उस दौरान वह गिर गया जिससे उसे चौटें आई और मौत हो गई तथा वह कोई कार्रवाई नहीं चाहती, लेकिन इस मामले में फिर पेच फंसा और मानव अधिकार आयोग ने पुलिस को मामले में चालान पेश करने के निर्देश दिए।
एक लाख की वसूली
मानव अधिकार आयोग के निर्देश पर आरोपी पुलिस कर्मियों की तनख्वाह से एक लाख रूपयों की कटौती कर मृतक की पत्नी को दिए गए। साथ ही डेढ़ लाख रूपये की राशि एससीएसटी वर्ग के लोगों पर होने वाले अपराध पर मिलने वाली राहत राशि के माध्यम से दी गई।
एसआई से बन गए हवलदार
11 साल के इस अंतराल में आरोपी पुलिस कर्मियों को विभागीय कार्रवाई के दौरान सजा मिली। घटना के वक्त इछावर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक महेश यादव पदोन्नत होकर एएसआई बन गए, लेकिन उन्हें वापस हवलदार बना दिया गया। साथ ही दोनों आरक्षकों की एक साल की वेतन वृद्धि रोक दी गई।
कैसे करे चालान पेश
पिछले 11 साल में मानव अधिकार आयोग लगातार इस मामले में कोर्ट में चालान प्रस्तुत करने के रिमांइडर भेजता रहा लेकिन पुलिस अधिकारी चालान प्रस्तुत नहीं कर सके इसके पीछे कानूनी पेंच यह है कि चालान तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब उसके साथ मृतक के अस्पताल के भर्ती के मूल दस्तावेज संलग्न करे। यह दस्तावेज पुलिस को बीते 11 साल में नहीं मिले और इस वजह से आदिम जाति कल्याण थाना चालान प्रस्तुत नहीं कर सका। यह सवाल यह भी उठता है कि इतने लंबे अंतराल में पुलिस को संबंधित दस्तावेज क्यों नहीं मिले।
गले की हड्डी बना चालान
यह मामला अपने आप में अनौखा मामला है इस मामले में पहले तो पुलिस ने अपनी छवि सुधारने के लिए पुलिस कर्मियों का मामला दर्ज कर लिया ओर जब फरियादी ने कोर्ट में बयान बदले लेकिन मामला फिर खुला तब पुलिस की उलझने बढ़ गई। इस मामले में यदि पुलिस बिना दस्तावेज के चालान प्रस्तुत करती है तो आला पुलिस अधिकारियों से लेकर मामले के अब तक के विवेचक धारा 4 क के तहत जेल जा सकते हैं।
अब देर क्यों
इस मामले में पुलिस आखिरकार अब खात्मा लगाने का मन बना चुकी है और ऐसे में बीते महीनों में पुलिस जाने क्यों इस मामले को लटकाए हुए हैं।
ुइनका कहना है
मामले की डायरी आईजी एजेके के समक्ष प्रस्तुत की गई है साथ ही मामले से संबंधित रिपोर्ट भी एसपी साहब ने फारवड की है वह से जैसे निर्देश मिलेंगे वैसा काम किया जाएगा।
नरेन्द्र तिवारी, डीएसपी एजेके थाना सीहोर

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