मंगलवार, 20 मार्च 2012

प्रैक्टीकल के नाम पर अवैध वसूली

सीहोर। शिक्षा के मंदिर स्कूलों को कतिपय शिक्षकों द्वारा अपनी अतिरिक्त कमाई का जरिया किस तरह बना लिया जाता है, इसका उदाहरण शहर के शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या शाला में बनाए गए परीक्षा केन्द्र में देखा जा सकता है, जहां परीक्षकों द्वारा सोमवार को कक्षा 12 वीं के स्वध्यायी परीक्षार्थियों से प्रायोगिक परीक्षा के नाम 50 से 80 रूपए तक ऐंठे गए।
प्राप्त जानकारी अनुसार सोमवार को कक्षा 12 वीं के परीक्षार्थियों की पर्यावरण संबंधी विषय की प्रायोगिक परीक्षा थी। इस परीक्षा में लगभग 70 स्वध्यायी परीक्षार्थी शामिल हुए थे।
गमले नहीं तो लाओ रूपए
सोमवार को जब कक्षा 12 वीं के परीक्षार्थी प्रायोगिक परीक्षा देने पहुंचे तो वहां मौजूद परीक्षकों द्वारा परीक्षार्थियों से गमले में लगा पौधा लाने को बोला गया और गमला व पौधा न लाने पर उनसे 50 से 80 रूपए लिए गए। इस अवैध वसूली को वहां मौजूद शिक्षकों द्वारा खुलेआम अंजाम दिया गया।
यह पौधा नहीं चलेगा
कक्षा 12 वीं के पर्यावरण विषय की प्रायोगिक परीक्षा देने पहुंचे कुछ परीक्षार्थी अपने साथ पौधा और गमला भी लेकर आए थे, लेकिन परीक्षकों द्वारा उनके पौधों को अमान्य घोषित करते हुए रूपए देने के लिए दवाब बनाया गया और उनसे रूपए लेने के बाद ही उन्हें परीक्षा में शामिल किया गया।
अगली परीक्षा में लेकर आना
परीक्षार्थियों से रूपए ऐंठने वाले परीक्षकों ने अवैध वसूली के दौरान मानवता भी दिखाई। जिस परीक्षार्थी के पास रूपए नहीं थे, उसे अगले प्रश्रपत्र वाले दिन रूपए लाने की हिदायत दी गई तो जिस परीक्षार्थी के पास कुछ रूपए कम पड़े तो परीक्षकों ने उतने पर ही सब्र कर लिया। सूत्र बताते हैं कि शनिवार को भी प्रायोगिक परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों से प्रैक्टीकल के नाम पर अवैध वसूली की गई थी।
इस संबंध में जब सहायक केन्द्राध्यक्ष मृदुला दुबे से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने किसी भी परीक्षार्थी से रूपए लिए जाने के मामले में अनिभज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि परीक्षार्थियों से गमले व पौधे लाने को कहा गया था, जो परीक्षार्थी नहीं लाए होंगे, उनसे प्रैक्टीकल फाईल के लिए परीक्षकों द्वारा रूपए लिए गए होंगे।
इनका कहना है
अगर प्रायोगिक परीक्षा के नाम पर परीक्षार्थियों से रूपए लिए गए हैं तो यह गलत बात है। मैं मामले की जांच करूंगा और कोई परीक्षक दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
धर्मेन्द्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी

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