रविवार, 15 अप्रैल 2012

पर्वक्षक एक, बैठक ली दो

सीहोर। अगामी विधानसभा चुनाव को कांग्रेस के आला नेता भले ही एकजुट होने के आदेश दे रहे हो पर सीहोर में इसका कोई असर नहीं हो रहा है सोमवार को भोपाल से पर्वक्षक रूप में आर्इं प्रदेश महामंत्री डां. तनिमा दत्ता को गुटबाजी के चलते कग्रेसियों की दो अलग बैठको में शामिल होना पड़ा। वे यहां 16 मई का होने वाले कांग्रेस के अंदोलन की जानकारी और रूपरेखा बताने आर्इं थी । दोपहर में जिला कांग्रेस कार्यालय में अध्यक्ष सहित कई कांगे्रसी पर्वक्षक डां. तनिमा दत्ता के आने का इंतजार कर रहे थे लेकिन वे एक खेत में पेड की छांव में रखी गई एक गुट की बैठक में चली गई जब यह खबर जिला कांग्रस कार्यालय पंहुची तो कई प्रकार कर चार्चाए शुरू हो गर्इं। कुछ देर में पर्वक्षक जिला कांग्रेस कार्याकय पहुंची और बैठक ली।

बुधवार, 11 अप्रैल 2012

इंदिरा जी इन्हें माफ कर देना...


सीहोर। कांग्रेसियों के लिए गांधी परिवार सर्वमान्य है, उनके बिना कांग्रेस की कल्पना संभवत: नमुमकिन है। कांग्रेस की सबसे दमदारी लीडर और देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सीहोर के कांग्रेसियों को शायद माफ न कर सकें। इसके पीछे कारण यह है कि वाह-वाही लूटने के लिए कांग्रेसियों ने शहर के एक चौराहा को प्रियदर्शनी चौराहे का नाम दिया। वहां इंदिरा गांधी की प्रतिमा लगाने की कसमें खार्इं। नगरपालिका परिषद में प्रस्ताव पास भी हुआ, लेकिन विडंबना देखिए कि कांग्रेस की परिषद में इस प्रस्ताव का क्रियान्वयन नहीं हो सका।
चुनाव हुए भारतीय जनता पार्टी की परिषद चुनी गई। शहर में चौराहों का सौंदर्यीकरण का कार्य शुरु हुआ। इस दौरान सुगबुगाहट शुरु हुई कि प्रियदर्शनी चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा नहीं लगेगी। उस समय परिषद की शुरुआत बैठक में कुछ कांग्रेसी पार्षदों ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन उस समय मामले को आया-गया कर दिया गया। वक्त बीता और अचानक चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा न लगाते हुए कुछ नाचते-गाते लोगों की प्रतिमा लगा दी गई। चौराहे को खूबसूरत बनाया गया। इसमें लागत 12 लाख रुपए आई, इसमें कोई दो राय नहीं कि इस चौराहे को नपा ने खूबसूरत बनाया है, लेकिन कांग्रेसियों के लिए शर्म की बात यह है कि जिस इंदिरा गांधी के नाम पर हर नेता वोट बंटोरता है अपनी आस्था गांधी परिवार में बताता है, उन्हीं कांग्रेसियों ने इस प्रियदर्शनी चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा नहीं लगाए जाने का विरोध तक नहीं किया। यहां तक कि विरोध में एक विज्ञप्ति भी जारी नहीं हुई, इसका यह मतलब निकाला जाए कि सीहोर जिले के कांग्रेसियों को इंदिरा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है या फिर विपक्ष की भूमिका में अपने-आप को खड़ा करने का नाटक कर रहे कांग्रेसियों ने अपने आप को बेच दिया।
दोष इनका नहीं
प्रियदर्शनी चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा वर्तमान नगरपालिका परिषद ने नहीं लगाई, तो दोष परिषद का नहीं है। दोषी तो कांग्रेस है, जिसने इस चौराहे का नाम प्रियदर्शनी चौराहा रखा और यहां इंदिरा गांधी की प्रतिमा लगाए जाने की झूठी कसम खाई।
इन्हें माफ कर देना...
देश की सबसे सशक्त महिला नेत्री इंदिरा गांधी अब इस दुनिया में नहीं है। उनकी पार्टी के लोग ही उनके लिए लड़ाई नहीं लड़ सके। जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया, उसी पार्टी के नेता उनकी प्रतिमा लगाए जाने को लेकर कन्नी काट रहे हैं और दावा करते हैं कि वह कांग्रेसी हैं। स्व. इंदिरा गांधी शायद इन्हें माफ कर दें, परंतु यह बात इतिहास में अमर हो गई है कि चौराहों पर टेंट लगाकर बड़ी-बड़ी बात करने वाले यह कांग्रेसी अपनी सर्वमाननीय नेता के लिए लड़ाई नहीं लड़ सकते, तो क्या जनता की लड़ाई लड़ने में यह सक्षम हैं?

रविवार, 8 अप्रैल 2012

‘मर्यादा’ में नहीं रुचि

सीहोर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मर्यादा अभियान में जनपद अध्यक्षों की रुचि नहीं है। वह इस अभियान से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। ऐसा ही कुछ दिखाई दिया मर्यादा अभियान की पहली एक दिवसीय कार्यशाला में, जिसमें बकायदा आमंत्रण भेजने के बावजूद एक भी जनपद अध्यक्ष और जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं आए।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इच्छा है कि वर्ष 2015 तक मप्र का हर गांव निर्मल और स्वच्छ हो जाए, लेकिन जिनके ऊपर यह जिम्मेदारी है, उन्हें मुख्यमंत्री की इस इच्छा से लेना-देना नहीं है। तभी तो समग्र स्वच्छता अभियान के अंतर्गत मुख्यमंत्री द्वारा शुरु किए गए मर्यादा अभियान की पहली कार्यशाला शनिवार को आयोजित की गई। इस कार्यशाला में जिपं ने सभी जनपद अध्यक्षों, जिला पंचायत अध्यक्ष, सरपंचों एवं पंचों को आमंत्रित किया था। पर पांच जनपद अध्यक्षों में से एक भी कार्यशाला में शामिल नहीं हुआ। जबकि इस कार्यशाला में प्रशासनिक स्तर पर सबसे व्यस्त रहने वाले कलेक्टर डॉ. संजय गोयल मौजूद रहे। उन्होंने कार्यशाला में सार्थक बातचीत की, बल्कि उन जनप्रतिनिधियों का भी मनोबल बढ़ाया, जिन्होंने इस क्षेत्र में अच्छा कार्य किया है। कार्यशाला में कुछ सरपंच और पंच शामिल हुए। इसके अलावा बुधनी विकासखंड से महिला जनप्रतिनिधि भी शामिल हुर्इं।
क्या है मर्यादा अभियान?
मर्यादा अभियान समग्र स्वच्छता अभियान का दूसरा भाग है। इस अभियान के तहत गांव में शौचालय का निर्माण किया जाएगा। जिले में शौचालय विहीन घरों को चिन्हित कर उनमें शौचालय बनाए जाने का कार्य तेजी से होगा, इसके अलावा इस अभियान के दौरान लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक किया जाएगा। इस अभियान में बच्चों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, इनके माध्यम से सार्थक संदेश दिए जाएंगे।
दो करोड़ का अभियान
जानकारी के मुताबिक इस अभियान में दो करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है। इस राशि से न केवल शौचालय बनाए जाएंगे। बल्कि पानी विहीन शौचालयों में पानी की व्यवस्था भी की जाएगी। साथ ही पूर्व में बनाए गए शौचालयों को पुन: निर्मित किया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीणों की जागरुकता के लिए भी इस राशि का उपयोग होगा। जिला पंचायत ने पूरी कार्य योजना तैयार की है, जिसका क्रियान्वयन होना है।
जंगल न जाए बहु-बेटी
मर्यादा अभियान के दौरान अधिकारी, समाजसेवी, सामाजिक संगठनों के सदस्य गांव की चौपाल पर पहुंचकर ग्रामीणों को मर्यादा का वास्ता देंगे और उन्हें समझाएंगे कि बहु और बेटी शौच के लिए जंगल जाती हैं तो मर्यादा का उल्लंघन होता है। इसीलिए वे अपने घर में पक्के शौचालय बनवाए, जिससे कि उनके घर की बहु एवं बेटियों को जंगल में न जाना पड़े। यह बात ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधि घर-घर जाकर ग्रामीणों को समझाएंगे, जिससे कि ग्रामीणों में जागरुकता आएगी।
सभी का लेंगे सहयोग
सहायक परियोजना अधिकारी गणेशसिंह चौहान ने बताया कि मर्यादा अभियान में सभी का सहयोग लिया जाएगा। इस अभियान को सुचारु रुप से चलाने के लिए जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, समाजसेवियों को इससे जोड़ा जाएगा। गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों के बीच स्वच्छता पर चर्चा होगी। साथ ही उन्हें स्वच्छता रखने के सुखद परिणामों की जानकारी भी दी जाएगी। उन्हें गंदगी के कारण होने वाली बीमारियों से अवगत कराया जाएगा और शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करेंगे।

प्रियदर्शनी चौराहे पर नहीं लगेगी ‘इंद्रा’ की प्रतिमा



सीहोर। राजनीति में अब महापुरुषों को भी बख्शा नहीं जा रहा है। कांग्रेस की पिछली नगरपालिका परिषद में प्रियदर्शनी चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा लगाए जाने का प्रस्ताव पास किए जाने के बाद अब वर्तमान नगरपालिका परिषद यहां इंदिरा गांधी की प्रतिमा के स्थान पर दस लाख रुपए की लागत से नाचती हुर्इं प्रतिमाएं लगाने जा रही है।
शहर के चौराहों में से एक प्रियदर्शनी चौराहे पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा को नहीं लगाया जाएगा। इस चौराहे पर जल्द ही पांच नाचती हुर्इं प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। संभवत: आगामी मंगलवार तक यहां प्रतिमाओं को लगाने का काम पूरा हो जाएगा। जबकि पिछली परिषद में इस चौराहे का नाम प्रियदर्शनी चौराहा किया गया था, वहीं इस चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा स्थापित किए जाने का प्रस्ताव पीआईसी और परिषद में पास हुआ था।
मानसिकता उजागर
नपा के इस कार्य से भाजपा की मानसिकता उजागर होती है। कांग्रेस इसका विरोध करेगी। यहां इंदिरा जी की ही प्रतिमा लगाई जाएगी।
कैलाश परमार,
अध्यक्ष, जिला कांग्रेस
ओछी राजनीति
यह ओछी राजनीति है, इंदिरा गांधी को दुनिया में ऊंचा मुकाम प्राप्त है। उनकी प्रतिमा प्रियदर्शनी चौराहे पर लगनी चाहिए, यह प्रस्ताव परिषद में पास हुआ है।
राकेश राय,
पूर्व नपाध्यक्ष, सीहोर
सड़कों पर विरोध
नपा के इस कार्य का कांगे्रसजन सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे। इस चौराहे पर इंदिरा जी की प्रतिमा लगाने के लिए कांग्रेस कुछ भी करेगी।
महेंद्र सिंह अरोरा,
महामंत्री, जिला कांग्रेस

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

कोल्डड्रिंक की बोतलों में काई




सीहोर। गर्मी का मौसम अपने चरम पर पहुंच गया है। आसमान से बरस रही आग और भीषण गर्मी से हलकान नागरिक अपने सूखे कंठ को तर करने के लिए शीतल पेय का उपयोग करने लगे हैं, लेकिन शहर में जिस तरह अमानक स्तर के शीतल पेय पदार्थों का चलन जारी है, उसे देखकर लगता है कि कहीं यह अमानक शीतल पेय सेहत के लिए नुकसानदायक साबित न हो जाएं।
गर्मी का मौसम प्रारंभ होने के साथ ही शहर में शीतल पेय का कारोबार प्रारंभ हो जाता है। शहर में जहां मधुशालाएं लग जाती हैं, वहीं कोल्डड्रिंक की दुकानों पर भी बोतलबंद शीतल पेय गटकते लोग नजर आने लगते हैं। ऐसे में इन शीतल पेय की गुणवत्ता पर संबंधित विभाग द्वारा कोई नजर नहीं रखे जाने के कारण नामी- गिरामी ब्रांडों से मिलते- जुलते शीतल पेय की बाढ़ सी आ जाती है। ऐसे नकली शीतल पेय का सेवन करने के बाद व्यक्ति को गर्मी से राहत का तात्कालिक अनुभव तो होता है, लेकिन आग चलकरयह शीतल पेय शरीर में अनेक असाध्य बीमारियों को जन्म दे देते हैं।
बोतल में काई
अब तक बहुराष्टÑीय कंपनियों के शीतल पेय में मक्खी, पाऊच और कीड़े- मकोड़े पाए जाने के मामले सामने आने के बाद भी संबंधित कंपनियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से शीतल पेय की गुणवत्ता का कतई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। यही कारण है कि मंगलवार को एक कोल्डड्रिंक की दुकान पर बिक रहे बोतलबंद पेय पदार्थ में काई तैरती साफ नजर आ रही थी। कोल्ड ड्रिंक विक्रेता मनोज चौरसिया ने प्रदेश टूडे को उक्त काईयुक्त कोल्डड्रिंक की बोतल दिखाते हुए कहा कि इस बोतल पर निर्माण की तिथि आदि तो सही है, लेकिन बोतल में काई जमी है जो बाहर से देखने पर भी नजर आ रही है। उन्होंने कह कि इस बारे में उन्होंने उक्त कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर को भी अवगत करा दिया है।
शुरू नहीं हुई कार्रवाई
गर्मी का मौसम प्रारंभ होने के साथ सजी कोल्डड्रिंक की दुकानों पर बिक रहे शीतल पेय पदार्थों की जांच करने के लिए पहले की ही तरह खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग अपनी नींद से जागा नहीं है। यही कारण है कि आज तक किसी भी शीतल पेय बेचने वाली दुकान पर जांच किया जाना आवश्यक समझा गया है।
बोतल अलग तो ढक्कन दूसरा
शहर की दुकानों पर बिक रहे कोल्डड्रिंक का हाल यह है कि बोतल किसी दूसरी कंपनी की है तो उस पर लगा ढक्कन किसी दूसरी कंपनी का है। ऐसे में अगर उसमें भरा शीतल पेय किसी तीसरी व निम्न स्तर का हो तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कुछ ऐसा ही हाल शहर में बिक रहे पानी के पाऊच का है। इन पाऊचों पर न तो निर्माण तिथि अंकित रहती है और न ही कंपनी का नाम स्पष्ट रहता है। इन पाऊचों में भरा पानी बदबूदार होने के अलावा बीमारियों को भी दावत देने वाला होता है, लेकिन संबंधित विभाग इनकी धरपकड़ करने में उदासीन रवैया अपनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
इनका कहना है
विभाग द्वारा नियमित रूप से कोल्डड्रिंक की दुकानों पर जांच की जाती है और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि दुकानदार एक्सपायरी डेट के उत्पाद तो नहीं बेच रहा। फिर भी हम जांच कराएंगे और अगर किसी बोतल में काई मिली है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
बसंतदत्त शर्मा
खाद्य सुरक्षा अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग सीहोर

ट्रेन रोककर जताया आक्रोश




सीहोर। भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा द्वारा केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ किए जा रहे रेल रोको आंदोलन के तहत किसान मोर्चा की जिला इकाई द्वारा स्थानीय रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को रोककर जोरदार नारेबाजी की। इस अवसर पर अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था।
भाजपा किसान मोर्चा द्वारा केन्द्र सरकार से समर्थन मूल्य के गेहूं का दाम 1285 रूपए से बढ़ाकर 1800 रूपए किए जाने व किसानों को सब्सिडी बढ़ाने सहित अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को रेल रोको आंदोलन का आयोजन किया गया था।
पुलिस छावनी बना स्टेशन
किसान मोर्चा द्वारा किए जा रहे रेल रोको आंदोलन को देखते हुए रेलवे स्टेशन को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। हालांकि किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने दोपहर 12 से दो बजे तक ही अपना आंदोलन जारी रखने का आव्हान किया था, लेकिन पुलिस बल सुबह से ही स्टेशन पर तैनात हो गया था। रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी के अलावा थाना कोतवाली और मंडी से भी भारी पुलिस बल स्टेशन पर बुला लिया गया था। इसके अलावा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता, एसडीओपी योगेश्वर शर्मा, कोतवाली थाना प्रभारी सतीश महलवाला, मंडी थाना प्रभारी मुनीष राजौरिया स्टेशन पर मौजूद थे। प्रशासनिक अधिकारियों के रूप में अपर कलेक्टर एमएल विजयवर्गीय, अपर तहसीलदार राजेन्द्र पंवार, नायब तहसीलदार शिल्पी दिवाकर स्टेशन पर थे।
आ गए भाजपा नेता
किसान मोर्चा के आंदोलन को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल भले ही सुबह से तैनात था, लेकिन किसान मोर्चा एवं भाजपा के नेता व कार्यकर्ता दोपहर 12 बजे स्टेशन पर पहुंचे। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ता केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे। रेल रोको आंदोलन से पूर्व कार्यकर्ताओं को किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष मानसिंह पंवार, भाजपा जिला अध्यक्ष रघुनाथ सिंह भाटी, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा, किसान मोर्चा के प्रादेशिक नेता शंकरलाल शर्मा, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष ललित नागौरी आदि ने भी संबोधित करते हुए केन्द्र की कांग्रेस सरकार को जमकर कोसा।
पहले ही रूक गई ट्रेन
भोपाल से चलकर दाहोद की ओर जाने वाली ट्रेन का सिग्नल होता देख भाजपा नेता व कार्यकर्ता पटरियों पर उतर आए थे और जमकर नारेबाजी कर रहे थे। पटरियों पर भाजपा कार्यकर्ताओं का समूह देखकर ट्रेन के चालक ने उनसे कुछ ही दूरी पर ट्रेन को रोक दिया था। भाजपा कार्यकर्ताओं ने ट्रेन के इंजन पर चढ़कर जमकर नारेबाजी की। सांकेतिक रेल रोको कार्यक्रम के शांतिपूर्ण सम्पन्न हो जाने पर रेल्वे प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।

युवती ने फांसी लगाई

कालापीपल। मंगलवार को ग्राम खोखराकलां में रहने वाली एक 18 वर्षीय युवती ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार खोखराकला निवासी जगदीश शर्मा की 18 वर्षीय पुत्री पूजा शर्मा सोमवार की रात भोजन के बाद अपने कमरे में जाकर सो गई थी सुबह जब देर तक उसके कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों ने दरवाजा तोड़ दिया पूजा का शव रस्सी के फंदे पर लटकता हुआ मिला। इसकी सूचना पुलिस को दी गई मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पीएम के लिए भेज दिया। इस मामले में पुलिस का कहना है कि फिलहाल आत्महत्या का कारण ज्ञात नहीं हो सका है। परिजनों से पूछताछ के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

अवैध उत्खनन पकड़ने पहुंचे थे नेता प्रतिपक्ष

सीहोर। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया मंगलवार को शाहगंज क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन पकड़ने के लिए विधायकों सहित पहुंचे थे। कई घंटे रूकने के बावजूद उनके हाथ कुछ नहीं लगा और वह वापस भोपाल रवाना हो गए। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरने के लिए नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया कांग्रेस विधायकों सहित उनके विधानसभा क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन को पकड़ने के लिए मंगलवार को चोरी छुपे पहुंचे थे। उनके साथ भगवान राजपूत, बरेली विधायक मोहन सिंह चौहान तथा स्थानीय नेता महेश राजपूत थे। श्री सिंह शाहगंज क्षेत्र के बनेठा प्लांट, जैत, नारायण पुर और जनवासा रेत घाटों पर पहुंचे थे उन्होंने रेत परिवहन को लेकर वहां मौजूद लोगों से बातचीत भी की उन्हें तब निराशा हुई जब अवैध उत्खनन के कोई भी दृश्य उन्हें नहीं दिखाई दिए दोपहर बाद वह वापस भोपाल की और रवाना हो गए उनके आने की खबर किसी को भी नहीं थी। श्री सिंह के इस तरह से मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में चोरी छुपे आकर रेत घाटों पर पहुंचना राजनीतिक चर्चाओं में आ गया है। नेताओं का अंदाजा है कि राहुल भैया अब स्वयं मुख्यमंत्री को उनके ही गृह क्षेत्र में घेरने की तैयारी में लग गए हैं।

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