बुधवार, 11 अप्रैल 2012

इंदिरा जी इन्हें माफ कर देना...


सीहोर। कांग्रेसियों के लिए गांधी परिवार सर्वमान्य है, उनके बिना कांग्रेस की कल्पना संभवत: नमुमकिन है। कांग्रेस की सबसे दमदारी लीडर और देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सीहोर के कांग्रेसियों को शायद माफ न कर सकें। इसके पीछे कारण यह है कि वाह-वाही लूटने के लिए कांग्रेसियों ने शहर के एक चौराहा को प्रियदर्शनी चौराहे का नाम दिया। वहां इंदिरा गांधी की प्रतिमा लगाने की कसमें खार्इं। नगरपालिका परिषद में प्रस्ताव पास भी हुआ, लेकिन विडंबना देखिए कि कांग्रेस की परिषद में इस प्रस्ताव का क्रियान्वयन नहीं हो सका।
चुनाव हुए भारतीय जनता पार्टी की परिषद चुनी गई। शहर में चौराहों का सौंदर्यीकरण का कार्य शुरु हुआ। इस दौरान सुगबुगाहट शुरु हुई कि प्रियदर्शनी चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा नहीं लगेगी। उस समय परिषद की शुरुआत बैठक में कुछ कांग्रेसी पार्षदों ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन उस समय मामले को आया-गया कर दिया गया। वक्त बीता और अचानक चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा न लगाते हुए कुछ नाचते-गाते लोगों की प्रतिमा लगा दी गई। चौराहे को खूबसूरत बनाया गया। इसमें लागत 12 लाख रुपए आई, इसमें कोई दो राय नहीं कि इस चौराहे को नपा ने खूबसूरत बनाया है, लेकिन कांग्रेसियों के लिए शर्म की बात यह है कि जिस इंदिरा गांधी के नाम पर हर नेता वोट बंटोरता है अपनी आस्था गांधी परिवार में बताता है, उन्हीं कांग्रेसियों ने इस प्रियदर्शनी चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा नहीं लगाए जाने का विरोध तक नहीं किया। यहां तक कि विरोध में एक विज्ञप्ति भी जारी नहीं हुई, इसका यह मतलब निकाला जाए कि सीहोर जिले के कांग्रेसियों को इंदिरा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है या फिर विपक्ष की भूमिका में अपने-आप को खड़ा करने का नाटक कर रहे कांग्रेसियों ने अपने आप को बेच दिया।
दोष इनका नहीं
प्रियदर्शनी चौराहे पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा वर्तमान नगरपालिका परिषद ने नहीं लगाई, तो दोष परिषद का नहीं है। दोषी तो कांग्रेस है, जिसने इस चौराहे का नाम प्रियदर्शनी चौराहा रखा और यहां इंदिरा गांधी की प्रतिमा लगाए जाने की झूठी कसम खाई।
इन्हें माफ कर देना...
देश की सबसे सशक्त महिला नेत्री इंदिरा गांधी अब इस दुनिया में नहीं है। उनकी पार्टी के लोग ही उनके लिए लड़ाई नहीं लड़ सके। जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया, उसी पार्टी के नेता उनकी प्रतिमा लगाए जाने को लेकर कन्नी काट रहे हैं और दावा करते हैं कि वह कांग्रेसी हैं। स्व. इंदिरा गांधी शायद इन्हें माफ कर दें, परंतु यह बात इतिहास में अमर हो गई है कि चौराहों पर टेंट लगाकर बड़ी-बड़ी बात करने वाले यह कांग्रेसी अपनी सर्वमाननीय नेता के लिए लड़ाई नहीं लड़ सकते, तो क्या जनता की लड़ाई लड़ने में यह सक्षम हैं?

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