सीहोर। गर्मी का मौसम अपने चरम पर पहुंच गया है। आसमान से बरस रही आग और भीषण गर्मी से हलकान नागरिक अपने सूखे कंठ को तर करने के लिए शीतल पेय का उपयोग करने लगे हैं, लेकिन शहर में जिस तरह अमानक स्तर के शीतल पेय पदार्थों का चलन जारी है, उसे देखकर लगता है कि कहीं यह अमानक शीतल पेय सेहत के लिए नुकसानदायक साबित न हो जाएं।
गर्मी का मौसम प्रारंभ होने के साथ ही शहर में शीतल पेय का कारोबार प्रारंभ हो जाता है। शहर में जहां मधुशालाएं लग जाती हैं, वहीं कोल्डड्रिंक की दुकानों पर भी बोतलबंद शीतल पेय गटकते लोग नजर आने लगते हैं। ऐसे में इन शीतल पेय की गुणवत्ता पर संबंधित विभाग द्वारा कोई नजर नहीं रखे जाने के कारण नामी- गिरामी ब्रांडों से मिलते- जुलते शीतल पेय की बाढ़ सी आ जाती है। ऐसे नकली शीतल पेय का सेवन करने के बाद व्यक्ति को गर्मी से राहत का तात्कालिक अनुभव तो होता है, लेकिन आग चलकरयह शीतल पेय शरीर में अनेक असाध्य बीमारियों को जन्म दे देते हैं।
बोतल में काई
अब तक बहुराष्टÑीय कंपनियों के शीतल पेय में मक्खी, पाऊच और कीड़े- मकोड़े पाए जाने के मामले सामने आने के बाद भी संबंधित कंपनियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से शीतल पेय की गुणवत्ता का कतई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। यही कारण है कि मंगलवार को एक कोल्डड्रिंक की दुकान पर बिक रहे बोतलबंद पेय पदार्थ में काई तैरती साफ नजर आ रही थी। कोल्ड ड्रिंक विक्रेता मनोज चौरसिया ने प्रदेश टूडे को उक्त काईयुक्त कोल्डड्रिंक की बोतल दिखाते हुए कहा कि इस बोतल पर निर्माण की तिथि आदि तो सही है, लेकिन बोतल में काई जमी है जो बाहर से देखने पर भी नजर आ रही है। उन्होंने कह कि इस बारे में उन्होंने उक्त कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर को भी अवगत करा दिया है।
शुरू नहीं हुई कार्रवाई
गर्मी का मौसम प्रारंभ होने के साथ सजी कोल्डड्रिंक की दुकानों पर बिक रहे शीतल पेय पदार्थों की जांच करने के लिए पहले की ही तरह खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग अपनी नींद से जागा नहीं है। यही कारण है कि आज तक किसी भी शीतल पेय बेचने वाली दुकान पर जांच किया जाना आवश्यक समझा गया है।
बोतल अलग तो ढक्कन दूसरा
शहर की दुकानों पर बिक रहे कोल्डड्रिंक का हाल यह है कि बोतल किसी दूसरी कंपनी की है तो उस पर लगा ढक्कन किसी दूसरी कंपनी का है। ऐसे में अगर उसमें भरा शीतल पेय किसी तीसरी व निम्न स्तर का हो तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कुछ ऐसा ही हाल शहर में बिक रहे पानी के पाऊच का है। इन पाऊचों पर न तो निर्माण तिथि अंकित रहती है और न ही कंपनी का नाम स्पष्ट रहता है। इन पाऊचों में भरा पानी बदबूदार होने के अलावा बीमारियों को भी दावत देने वाला होता है, लेकिन संबंधित विभाग इनकी धरपकड़ करने में उदासीन रवैया अपनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
इनका कहना है
विभाग द्वारा नियमित रूप से कोल्डड्रिंक की दुकानों पर जांच की जाती है और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि दुकानदार एक्सपायरी डेट के उत्पाद तो नहीं बेच रहा। फिर भी हम जांच कराएंगे और अगर किसी बोतल में काई मिली है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
बसंतदत्त शर्मा
खाद्य सुरक्षा अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग सीहोर







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