


सीहोर। सोमवार को 11 सूत्रीय मांगों को लेकर विभिन्न कर्मचारी संगठन और यूनियन ने रैली निकालकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। कर्मचारियों की हड़ताल पर रहने की वजह से बैंक और सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा छाया रहा।
सुबह 11 बजे सभी कर्मचारी संघ यूनियन, बैंक कर्मी कोतवाली चौराहा पर एकत्रित हुए और शहर के मेन रोड, बड़ा बाजार होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची जहां कर्मचारियों, मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
कार्यालयों में रहा सन्नाटा
कर्मचारियों को हड़ताल पर रहने के कारण सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा एक्का दुक्का कार्यालय में ही अधिकारियों के चेम्बर भरे थे अन्यथा अधिकांश अधिकारी भी अघोषित अवकाश पर रहे।
प्रभावित हुआ बैंक कारोबार
बैंक कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण सभी बैंकों का काम काज प्रभावित हुआ है। करोड़ों रूपये का लेनदेन आज नहीं हो सका बैंकों में पहुंचने वाले लोग लेन देन नहीं होने के कारण परेशान होकर वापस लौटते रहे।
असंगठित मजदूर भी हड़ताल पर
शहर और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले असंगठित मजदूर भी राष्टÑव्यापी हड़ताल में शामिल हुए। जिसके कारण कृषि उपज मंडी, निर्माण कार्य और अन्य कार्य प्रभावित हुए हैं।
नहीं हुई जन सुनवाई
राष्टÑवादी हड़ताल का असर प्रति मंगलवार होने वाली जनसुनवाई पर भी पड़ा है। सरकारी कार्यालयों में आवेदन कर्ता तो पहुंचे लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था अधिकारी भी कर्मचारियों के नही होने पर जनसुनवाई नहीं कर सके।
यह संगठन हुए शामिल
हड़ताल में सेन्टर आफ यूनियन सीटू, बीएमएस, राज्य कर्मचारी संघ, मजदूर एकता फेडरेशन, बैंक कर्मचारी संगठन, बीएसएनएल कर्मचारी संघ, बीमा कर्मचारी संघ, हम्मला मिलावट संघ, डाकघर कर्मचारी संघ, पल्लेदार एवं मजदूर संघ सहित अन्य संगठन शामिल हुए हैं।
यह है 14 सूत्रीय मांगे
कर्मचारियों और मजदूरों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में 11 सूत्रीय मांगे रखी गई है, जिसमें दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करना, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, गैस टंकी हाकरो को 10 हजार रूपये प्रतिमाह वेतन, गरीबों के लिए मुफ्त अनाज, शिक्षा और चिकित्सा मुफ्त देना, राज्य कर्मचारियों को भी केन्द्र के सामान महंगाई भत्ता दिए जाने, भ्रष्टाचार रोकने, महंगाई कम करने, गेंगमेन को नियमित करने सहित अन्य मांगे शामिल है।
साइड स्टोरी
नहीं आई काम वाली बाई
घरों में भी दिखा हड़ताल का असर
सीहोर। मजदूरों और कर्मचारियों की राष्टÑव्यापी हड़ताल का असर घर में भी दिखाई दिया। सुबह से ही घर में तनाव देखा गया चूंकि मंगलवार को काम वाली बाई नहीं आई थी।
गौरतलब है कि अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्टÑव्यापी हड़ताल में पहली मर्तबा घर में घरेलू काम करने वाली महिलाएं भी हड़ताल में शामिल हो गई जिसकी वजह से मंगलवार को वह काम पर नहीं पहुंची उनके काम पर न पहुंचने से अनेक घरों में सुबह से ही हड़कंप मच गया। कई घरों में सुबह के काम परिवार के सदस्यों ने मिल बांट कर कर लिए वहीं महिलाओं ने रात तक का शेडयूल तय कर काम बांट दिए बच्चों को भी सख्त हिदायत दे दी गई कि आज कामवाली बाई नहीं आएगी इसलिए वह नियंत्रण में रहे।
कपड़े धोने का कार्य कल
सामान्यत अनेक घरों में काम वाली बाई के आने पर प्रतिदिन कपड़ों की धुलाई होती थी लेकिन मंगलवार को यह धुलाई बुधवार तक के लिए टाल दी गई वहीं अनेक ऐसे कार्याे को कल पर छोड़ दिया गया जिन्हें महिलाएं मंगलवार को नहीं करना चाहती थी।
पुरूषों पर भी दबाव
घरों में काम वाली बाई के नहीं आने पर पुरूषों पर भी दिखाई दिया। उन्हें हर बात पर यह कहां जाता रहा कि आज बाई नहीं आई है इसलिए काम स्वयं करने होंगे यह तक कि बर्तन धोने के मामले में भी काम को बांट दिया गया।