गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

ग्रामीण खुद तय करेंगे अपने गांव की तस्वीर

सीहोर। गांव में रहने वाले साधारण ग्रामीण अब अपने गांव के विकास और सुविधाओं को लेकर स्वयं सुझाव देंगे उनके यह सुझाव एक किताब में दर्ज किए जाएंगे यह किताब सीधे मानव संसाधन मंत्रालय को जाएगी। देश भर से एकत्रित किताबों को एक किताब में परिवर्तित कर यह किताब प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी।
गौरतलब है कि अब तक गांव की तस्वीर बदलने के लिए ग्राम पंचायतें प्रस्ताव बनाती रही है इन प्रस्तावों में ग्रामीणों की भूमिका नहीं रहती थी लेकिन अब केवल ग्रामीण ही तय करेंगे की उनका गांव कैसा होगा और क्या-क्या सुविधाएं उनके गांव में होनी चाहिए। शिक्षा विभाग और साक्षर भारत अभियान तथा ज्ञान विज्ञान समिति मिलकर ग्रामीणों के सुझाव एक किताब में दर्ज करेगी इस किताब का नाम जन किताब होगा।
50 पंचायतों में बनेंगी जन किताब
पहले चरण जिले कि 50 पंचायतों में जन किताब तैयार की जाएगी यह किताब पंचायत के माध्यम से तैयार होगी जिसमें ग्रामीणों के सपनों का गांव अंकित किया जाएगा।
3 फरवरी तक बनेगी किताब
तय कार्यक्रम के मुताबिक 3 फरवरी तक 50 पंचायतों में 12 पन्नों की जन किताब तैयार की जाएगी उस किताब का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। पंचायत भवन में ग्रामीण अपने सुझाव देंगे।
योजनाओं में जुडेंÞगे सुझाव
जन किताब में दर्ज ग्रामीणों के सुझाव गांव के विकास के लिए बनने वाली योजनाओं में जुड़ेंगे जिससे कि योजनाएं ग्रामीणों के जरूरत के मुताबिक होंगी। यह काम मानव संसाधन मंत्रालय करेगा।
इतिहास भी लिखेंगे ग्रामीण
जन किताब में गांव के विकास के सुझाव के विकास के अलावा पढ़े लिखे ग्रामीण अपने गांव का इतिहास भी अंकित कराएंगे जिससे कि गांव में पुरातत्व महत्व की वस्तुओं, स्थान और गांव का ऐतिहासिक महत्व की जानकारी एकत्र की जा सकेगी।
इनका कहना है
शिक्षा विभाग और ज्ञान विज्ञान समिति के माध्यम से 50 पंचायतों में जन किताब तैयार की जाएगी इस किताब में ग्रामीण गांव के विकास के लिए सुझाव देंगे यह किताब मानव संसाधन मंत्रालय को जाएगी।
आरसी राठौर, बीआरसीसी सीहोर

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