


सीहोर/इछावर। मंगलवार की सुबह क्षेत्र के एक स्कूल में गुस्साएं छात्र-छात्राओं ने स्कूल के मुख्यद्वार पर ताला जड़ दिया था। जो कि दोपहर को काफी मशक्कत के बाद खुलवाया गया। क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिराड़ी के माध्यमिक शाला के छात्र-छात्राओं ने अपने स्कूल में सालों से बच्चों को अध्यापन कार्य कराते आ रहे हैं शिक्षक ज्ञान सिंह परमार का जनशिक्षक पद पर चयन होने की बात सुनकर बच्चों ने एवं स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों ने स्कूल में समिति की बैठक कर एक प्रस्ताव पास कर ग्राम पंचायत की अनुशंसा कराकर एसडीएम धीरज श्रीवास्तव, बीईओ शिवनारायण पटेल को लिखित आवेदन प्रस्ताव की कापी देकर जन शिक्षक पद के लिए चयन किए जा रहे शिक्षक को शाला में शिक्षक के पद पर ही नियुक्ति रखने की मांग की थी। 23 नवबंर को दिया एवं 24 को जिला पंचायत सीईओ बीएस जामौद को भी लिखित आवेदन समिति के सदस्य देकर आए जिसमें छात्रों की और से 29 नवबंर को ताला डालकर हड़ताल करने की बात भी कही गई थी।
नहीं जागा प्रशासन
जिले से लेकर ब्लाक तक सभी जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन आवेदन देने के बाद भी जिम्मेदार प्रशासन के लोगों ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया जिसका जबाव मंगलवार को छात्र-छात्राओं ने स्कूल में ताला लगाकर दिया है।
नहीं पहुंचे जिम्मेदार
मंगलवार की सुबह छात्र-छात्राओं ने स्कूल में लगे ताले के ऊपर ही अपना ताला लगाकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और शिक्षक को स्कूल में पुन: पहुंचाने की मांग कर रहे थे। इस घटना की जानकारी पंचायत के जागरूक सरपंच जगदीश धाकड़ एवं पंचायत सचिव सतीश बैरागी ने बीईओ एवं बीआरसी को फोन पर मामले की जानकारी दी और स्कूल खुलवाने का आग्रह भी किया। लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी स्कूल खुलवाने नहीं पहुंचे।
नहीं खुलेगा ताला
बच्चों को बार-बार समझाने के बाद भी बच्चें एक ही जिद पर अड़े थे कि हमारे परमार साहब को यहां लाओं जब तक परमार साहब यहां नहीं आएंगे तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा।
मशक्कत के बाद खुला ताला
जिम्मेदार अधिकारी मौके पर अंत तक नहीं पहुंच पाए और अपने अधीनस्थों कर्मचारियों को रवाना कर दिया और कह दिया कि बच्चों को समझाकर स्कूल खुलवाना वहीं दिनेश नागर ने स्कूल प्रबंधन समिति के दायित्वों को विस्तार से बच्चों एवं समिति के लोगों को बताया कि बिना विद्यालय प्रबंधन समिति के कोई भी शिक्षक कही भी नहीं जा सकता है और जन शिक्षक के पद पर स्वेच्छा के बिना विभाग की पदस्थापना नहीं कर सकता तभी सरपंच, सचिव, एसएमसी के सदस्य बीएसी बहादुर सिंह के अथक प्रयास के बाद बच्चों ने स्कूल का ताला खोल दिया।
इनका कहना है
हमारे यहां इस नाम का कोई व्यक्ति जनशिक्षक नहीं है जन शिक्षक बनने के लिए अध्यापक की स्वेच्छा भी जरूरी है।
अशोक पराड़कर, डीपीसी सीहोर
इस मामले की जानकारी आपके द्वारा हुई है में अभी डीपीसी से चर्चा कर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी अगर बच्चें धूप में परेशान हुए हैं तो ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मौके पर अधिकारियों को पहुंचना चाहिए।
रमाकांत तिवारी, संयुक्त निर्देशक राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल







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