सोमवार, 24 दिसंबर 2012

लक्ष्मी तीन प्रकार की होती है-संत श्री गोविन्द जाने



सीहोर। लक्ष्मी तीन प्रकार की होती है। एक होती है आने जाने वाली, दूसरी होती है थोड़े समय की और तीसरी होती है सदैव घर में विराजमान रहने वाली श्री लक्ष्मी होती है। लक्ष्मी किसके यहां पर निवास करती है। श्री लक्ष्मी उसके घर में निवास करती है। जहां पर पर हर रोज अच्छे विचारों का आदान-प्रदान होता हो, जिसके यहां पर सत्संग और कीर्तन होते हो। उक्त उद्गार नगर के सिंधी कालोनी ग्राउंड पर गौदन सरकार सेवा समिति के तत्वाधान में जारी संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ के प्रथम दिवस मालवा माटी के लाल संत श्री गोविन्द जाने ने कहे। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक रमेश सक्सेना ने अपने जन्म दिवस के अवसर पर संत श्री गोविन्द जाने से आशीर्वाद ग्रहण किया। आशीर्वाद ग्रहण करने वालों में प्रमुख रूप से नगर पालिका अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, समिति के लोकेन्द्र मेवाड़ा, कैलाश अग्रवाल, अनिल पालीवाल, शैलेश पटेल, पुरु चांडक, रामकिशन मालवीय, दिनेश कटारिया, स्वदेश विश्वकर्मा आदि ने संत श्री से आशीर्वाद ग्रहण किया। 
संत श्री गोविन्द जाने ने आगे कहा कि संत वही होता है जो अपने लिये कम से कम समय रखता है और भगवान के सुमिरन में अधिक समय देता है। हम जितना अपने समय में कटौती करके भगवान के सुमिरन में लगने वाले समय को बढ़ाते जाते है उतना ही हम संतत्व की और बढ़ते हैं, परमात्मा की भक्ति नि:स्वार्थ करनी चाहिए, इसमें किसी प्रकार का लोभ व लालच नहीं होना चाहिए। अपने कर्मों को परमात्मा के चरणों में समर्पित करना चाहिए। 
कथा मोक्ष प्राप्ति का साधन
संत श्री गोविन्द जाने ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य के मोक्ष प्राप्ति का साधन व सार है। कथा सुनने से मनुष्य के पापों का नाश तो होता ही है। साथ ही वह बैकुण्ठधाम चला जाता है। अगर अच्छा व सुखी जीवन जीना चाहते हैं तो बांके बिहारी के नियमित भजन व सत्संग से एकीकार हो जाएं। इस अवसर पर संत ने कहा कि शक्तियां तीन प्रकार की होती है। हर शक्ति की अपनी परिभाषा है। भागवत कथा सकाम भावना से श्रवण कर सकते हैं और निष्काम भावना से श्रवण कर सकते हैं। कामना युक्त भक्तों की कामना भागवत की कथा से पूर्ण होती है तथा कामना रहित भक्तों को श्रीभागवत भगवान अहैतुक की भक्ति प्रदान करते राजा परीक्षित ने मृत्यु भय से बचने के लिए भागवत कथा का श्रवण किया था। 
परलोक की चिंता करो
भागवत कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य का पाप कटता है। बशर्ते श्रद्धालु उसे ध्यानपूर्वक सुनकर बताये मार्ग को अपने जीवन में ढाल लें। आज मनुष्य संसारिक सुख के पीछे भाग रहा है अर्थात धनोपार्जन के भाग में इस तरह अंधा हो गया है कि उसे अपना पराया, पाप पुण्य, झूठ, सच का पता ही नहीं है। संत श्री गोविन्द जाने ने श्रद्धालुओं को चेताते हुए कहा कि यह संसार तो यहीं छूट जाएगा। सबकुछ यही पड़ा रहेगा। केवल तुम जाओगे। इसलिए हे मानव परलोक के लिए भी कुछ करो, उसकी भी चिंता करो।
12 बजे से तीन बजे तक
गौदान सरकार समिति के लोकेन्द्र मेवाड़ा ने कहा कि मंगलवार से कथा दोपहर बारह बजे से तीन बजे तक नगर के बस स्टैंड स्थित सिंधी धर्मशाला के पीछे विशाल मैदान पर आयोजित की जा रही है। उन्होंने आस-पास के ग्रामीण श्रद्धालुओं से कथा का श्रवण करने की अपील की है।

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