बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

आनंद के सागर है भगवान श्री कृष्ण-श्री व्यास


सीहोर। भगवान हमेशा ही भोलेपन पर रीझते है। चाहे वह नरसिंह मेहता हो या सुदामा, जिन भी भक्तों पर भगवान ने दया की है, वह वैभव मान प्रतिष्ठा, सम्मान देखकर नहीं। बल्कि सहजता पर ही रीझे है। भगवान श्री कृष्ण दया और आनंद के सागर है। उक्त उद्गार ग्राम सेवानिया में जारी संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिवस पंडित श्याम जी व्यास रामकुटी वालों ने कही। कथा के पांचवें दिवस बुधवार को श्री व्यास ने कहा कि गोकुल की गलियों में मां यशोदा की गोद में पले-बढ़े कृष्ण ने अपनी बाल्यावस्था में ही अपने परम ब्रह्मा होने की अनुभूति से यशोदा व बृजवासियों को परिचित करा दिया था। उन्होंने पूतना, बकासुर, अघासुर, धेनुक और मयपुत्र व्योमासुर का वध कर बृज को भय मुक्त किया तो दूसरी ओर इंद्र के अभिमान को तोड़ गोवर्धन पर्वत की पूजा को स्थापित किया।
भगवान श्री कृष्ण और रुकमणी विवाह आज
गुरुवार को कथा के छठवें दिवस श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण और रुकमणी विवाह का आयोजन किया जाएगा। बुधवार को कथा के अंत में महा आरती के बाद छप्पन भोग का वितरण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं महा प्रसादी ग्रहण की।

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