शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

तीन शिक्षकों को नशा करना महंगा साबित हुआ सीईओ जिला पंचायत की मौजूदगी में बना पंचनामा

सीहोर ग्राम सारस में आज एक गुरूजी और दो अध्यापकों का नशा करना उस वक्त महंगा साबित हुआ जब ग्रामीणों ने सीईओ जिला पंचायत को इन तीन शिक्षकों की लापरवाही और नशे करने की शिकायत की। मौके पर शिक्षा गारंटी शाला कुसुमपुरा सारस के गुरूजी रामरतन करोपे, शा.मा.शाला सारस के प्रभारी प्रधान अध्यापक राजेश टोप्पो तथा प्राथमिक शाला लोहा पठार के अध्यापक कमल सिंह को नशे की हालत में पाए जाने पर इनका पंचनामा तैयार किया गया और तीनों को मेडिकल परीक्षण के लिए भिजवाया गया। जिला पंचायत के सीईओ श्री बी.एस.जामौद ने उक्त तीनों शिक्षकों की स्कूल से अनुपस्थिति और नशे की हालत को देखते हुए तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए।

मध्यान्ह भोजन की जांच
श्री जामौद ने माध्यमिक शाला सारस का निरीक्षण किया और उपस्थिति पंजी की जांच की। उन्होंने शाला में संचालित मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम की समीक्षा की तथा बच्चों को वितरण कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता परखी। श्री जामौद ने शिक्षकों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करें, समय पर स्कूल संचालित हो और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन का मीनू के अनुसार वितरण हो यह सुनिश्चित किया जाए। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित मध्यान्ह भोजन प्रभारी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

शिक्षकों के विरूद्ध कार्यवाही
जिला पंचायत के सीईओ ने आज ग्राम सारस के भ्रमण के दौरान प्राथमिक शाला नई चंदेरी, मिडिल स्कूल आबिदाबाद और लोहापठार का आकस्मिक निरीक्षण किया। नई चंदेरी में प्रात: 11 बजे तक शाला में उपस्थित नहीं होने पर संविदा शिक्षक वर्ग तीन सुनीता मेवाड़ा को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिए। मिडिल स्कूल आबिदाबाद में गुणवत्ता पूर्ण मध्यान्ह भोजन नहीं बनाने और किचिन शेड में स्वच्छता नहीं पाए जाने पर श्री जामोद ने समूह को हटाने और मध्यान्ह भोजन का संचालन ग्राम पंचायत को सौंपने के निर्देश दिए। मिडिल स्कूल लोहापठार में निरीक्षण के दौरान सहायक अध्यापक नीलू श्रीवास्तव और अतिथि शिक्षक केशराम डुडवे एवं हिम्मत सिंह घुर्वे अनुपस्थित पाए गए। श्री जामोद ने नीलू श्रीवास्तव की एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने और इसकी सर्विस बुक में एन्ट्री करने तथा अतिथि शिक्षक डुडवे और धुर्वे का एक दिन का मानदेय रोकने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मध्यान्ह भोजन प्रभारी जिला पंचायत श्री गणेश चौहान भी मौजूद थे।

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

देवी मंदिर से 2 लाख की चोरी

सीहोर। जिले के अहमदपुर थाना क्षेत्र के ग्राम वनखेड़ा में स्थित देवी मंदिर से 2 लाख रूपये के जेवर सहित अन्य सामान बीती रात अज्ञात चोर चोरी कर चंपत हो गए। पुलिसने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 389 के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज कर तलाश शुरू की है। जानकारी के अनुसार 28-29 दिसंबर की दरमियानी रात ग्राम वनखेड़ा में स्थित देवी मंदिर के दरवाजे का ताला तोड़कर अज्ञात चोरों ने अंदर प्रवेश किया और देवी प्रतिमा का चांदी का छत्र, मंगलसूत्र, दान पेटी सहित अन्य सामान भी चोरी कर भाग गए । सुबह जब मंदिर के पुजारी हरिदास वहां पहुंचे तो उन्हें मंदिर में चोरी होने की जानकारी मिली। पुजारी ने यह सूचना अहमदपुर थाना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने मौके का मुआयना कर ग्रामीणों से पूछताछ की लेकिन चोरों का सुराग नहीं मिला है। देर शाम एसडीओपी योगेश्वर शर्मा भी यहां पहुंचे और मामले की संपूर्ण जानकारी ली। उन्होंने बताया कि चोरों से संबंधित सुराग को जुटाया जा रहा है। संभवत: जल्द ही आरोपी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे।

रविवार, 25 दिसंबर 2011

सेल फैक्ट्री में संदिग्ध परिस्थितियों में मजदूर की मौत

सीहोर। जावर के नजदीक स्थित सेल फैक्ट्री में रविवार की शाम एक मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई हैँ पुलिस ने मजदूर की लाश उसके कमरे में फंदे से लटकी हुई बरामद की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जावर जोड़ के नजदीक स्थित सेल फैक्ट्री में शुजालपुर के ग्राम बड़ोदिया निवासी 26 वर्षीय मनोज पुत्र चंदर सिंह चौहान पिछले चार माह से फैक्ट्री में पेकिंग का कार्य कर रहा था। वह फैक्ट्री के द्वारा बनाए गए कमरा नम्बर 71 में रहता था। रविवार की शाम पुलिस को सूचना मिली की इस कमरे में मनोज की लाश टंगी हुई है। मौके पर पहुंची पुलिस ने लाश को फंदे से उतारा और पीएम के लिए भेज दिया। प्रथम दृष्टा में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। लेकिन फैक्ट्री के अंदरूनी सूत्रों की माने तो मनोज का पैसे के लेनदेन को लेकर अंदर ही किसी से विवाद हुआ था।

शनिवार, 24 दिसंबर 2011

25 साल में नहीं मिला उपभोक्ताओं को संरक्षण

श्रवण मावई
सीहोर। जिले के उपभोक्ताओं को संरक्षण देने वाली परिषद का गठन बीते 25 सालों में नहीं हो पाया। अंदाज लगाया जा सकता है कि गला काट व्यापारिक प्रतिद्वन्ता के दौर में उपभोक्ता कीमत , वजन, मात्रा, गुणवत्ता आदि हर मौके पर ठगा जा रहा है।
आज से ठीक 25 साल पहले 24 दिसंबर 1986 को देश में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किया गया। इस अधिनियम की धारा 8 के प्रावधानों के तहत देश और प्रदेश के साथ जिला स्तर पर भी उपभोक्ता संरक्षण परिषद का गठन किया जाना तय किया गया। इसके गठन के उददेश्यों पर अधिनियम में प्रकाश डाला गया है कि उपभोक्त ा को वस्तु या सेवाएं निर्धारित कीमत, वजन, मात्रा और बेहतर गुणवत्ता के साथ मिल सके ताकि उसका व्यापारिक रूप से शोषण रोका जा सके। इस परिषद के गठन के प्रावधानों में कलेक्टर अध्यक्ष और शासकीय व गैरशासकीय नामांकित सदस्य होंगे जो उपभोक्ताओं के अधिकारों का संरक्षण करेंगे। प्रावधानों के मुताबिक इस परिषद की बैठक अध्यक्ष के विवेक अनुसार साल में कम से कम दो बार और आवश्यकतानुसार कितनी भी बार की जा सकती है।
जिले में उपभोक्ता फोरम का गठन तो हुआ जो उपभोक्ता के साथ सेवाओं में कमी आने पर उसका अधिकार न्यायिक प्रक्रिया द्वारा दिलाती है, लेकिन उपभोक्ता, बाजार या अन्य सेवाओं में ठगा न जा सके इस पर नियंत्रण करने के लिए गठित होने वाली जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद का गठन बीते 25 सालों में जिले में नहीं हो पाया। समभवत: यही कारण है कि 40 प्रतिशत से ज्यादा बाजार पर नकली या सरकारी भाषा मेें कहे तो अमानक सामान ने कब्जा कर रखा है। स्वयं विभिन्न सरकारी आकड़े इस बात के गवाह है कि बाजार में से सामानों के एकत्रित किए गए नमूने सरकार की प्रयोगशाला में अमानक पाए गए। जिन्हें सीधे शब्दों में नकली या गुणवत्ताहीन कहा जा सकता है। सवाल यह उठता है कि 25 साल के लंबे अर्से में कानूनी प्रावधान होने के बाद भी उपभोक्ता के संरक्षण की पहल क्यों नहीं हुई । क्या बाजार की पूंजी और प्रशासन की शक्ति की मिली भगत से उपभोक्ता बाजार में लुट रहा है।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी एसके जैन से संपर्क करने के प्रयास किए गए लेकिन उनका मोबाइल लगातार बंद आया।

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

यह है मस्त अधिकारी




श्रवण मावई
सीहोर। बड़े अधिकारियों को अक्सर बेवजह गंभीर होने का भम्र बना रहता है वे अपने आसपास ऐसा माहौल भी बनाए रखते हैं, लेकिन जो वास्तव काम में विश्वास रखते हैं उन्हें मस्ती करने से भी गुरेज नहीं होता ऐसे ही एक अधिकारियों की एक टीम जिला मुख्यालय पर कार्य कर रहीहै जिनमें संयुक्त कलेक्टर से लेकर तहसीलदार तक शामिल है।
शहर में अतिक्रमण हटाने से लेकर अवैध उत्खनन तथा राजस्व रिकार्डों को दुरस्त किए जाने के मामले में किए गए कार्यों की जितनी प्रशंसा की जा सकती है उतनी कम है बैखोफ ओर निष्पक्षता से किए गए इन कार्यों को कुछेक अधिकारियों ने बखूबी से किया है, जिनमें अतिरिक्त कलेक्टर गिरीश शर्मा, एसडीएम इच्छित गढ़पाले, तहसीलदार अल्का इक्का, राजेश पंवार और नरेन्द्र ठाकुर शामिल है।
काम भी मस्ती भी
इन अधिकारियों की टीम ने कठिन काम को भी सहज ढंग से निपटा दिया और काम के दौरान मस्ती भी की हाल ही में अवैध उत्खनन को लेकर काले पहाड़ पर जांच करने पहुंचे इन अधिकारियों ने जमकर मस्ती की और अपने शोक को भी जगजाहिर किया।
फोटोग्राफी में अजमाए हाथ
संयुक्त कलेक्टर गिरीश शर्मा ने अपने फोटोग्राफी के शोक को सावर्जनिक किया उन्होंने एक फोटोग्राफर का केमरा लेकर पहाड़ के मनोहारी दृश्य केमरे में कैद किए और फोटोग्राफी के टिप्स भी लिए।
पानी पर पत्थर उछाला
मस्ती करने एसडीएम इच्छित गढ़पाले भी पीछे नहीं रहे उन्होंने पहाड़ पर खोदे गए गड्डों में जमा पानी पर पत्थर उछालने के करतब दिखाएंं। जिसे देखकर वहां मौजूद अन्य अधिकारी भी पत्थर फेंकने लगे।
दूर से लिए मजे
तहसीलदार अल्का इक्का, राजेश पंवार और नरेन्द्र ठाकुर ने अधिकारियों की मस्ती के मजे दूर से लिए।
तनाव होता है कम
इन अधिकारियों का मानना है कि काम के दौरान होने वाले तनाव को कम करने के लिए कुछ मस्ती करली जाई तो तनाव कम होता है ओर यह सही भी है।

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

सड़क के नमूनों पर कलेक्टर को संदेह

सीहोर। लोक निर्माण विभाग के कामकाज को लेकर यूं तो अनेक मर्तबा सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस विभाग पर लगाम कसने का काम पहली बार कलेक्टर डॉ संजय गोयल ने शुरू किया है। गत दिवस सड़क निर्माण में हुई अनियमितताओं को लेकर लिए गए नमूनों की जांच अब कलेक्टर स्वयं खड़े होकर कराएंगे।
गौरतलब है कि जिले की अनेक सड़कों में अनियमितताएं की गई है और इन्हीं की जांच के लिए विभाग ने सड़क के नमूने लिए हें जिनकी जांच भोपाल प्रयोगशाला में की गई। लेकिन इस जांच पर कलेक्टर संजय गोयल को संदेह उत्पन्न हो गया है उन्होंने सोमवार को पीडब्ल्युडी कार्यपालन यंत्री को भोपाल से नमूने वापस बुलाने के निर्देश दिए है।
सीहोर में होगी जांच
कलेक्टर संजय गोयल सड़क के नमूनों की जांच सीहोर में ही कराएंगे वह भी विभाग की प्रयोगशाला में। जांच के दौरान वह स्वयं मौजूद भी रहेंगे जिससे जांच रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी की गुंजाईश नहीं रहे।
क्यों हुआ संदेह
कलेक्टर संजय गोयल को भोपाल भेजे गए सड़क के नमूनों की जांच के संदेह इसलिए हुआ हे कि पीडल्ब्युडी के पास खुद की प्रयोगशाला है बावजूद इसके अब तक नमूनों की जांच भोपाल करवाई जाती रही है और पिछले वर्षों में एक भी नमूना गुणवत्ताहीन नहीं पाया गया।
संकट में विभाग
कलेक्टर के सख्त रवैये के चलते पीडब्ल्यु डी विभाग संकट में आ गया है चूंकि सड़क के नमूने की जांच के बाद गुणवत्ताहीन पाए गए तो फिर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होना तय है तो इसके अलावा अब तक भोपाल भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्टों पर भी जांच हो सकती है।
इनका कहना है
सड़क के नमूने वापस बुलाने के निर्देश कार्यपालन यंत्री को दिए हैं इनकी जांच विभाग की स्थानीय प्रयोगशाला में होगी उस समय में स्वयं मौजूद रहूंगा।
डॉ संजय गोयल, कलेक्टर सीहोर

रविवार, 18 दिसंबर 2011

ठेकेदार से अड़ी डालकर दो लाख रुपए की मांग

नसरुल्लागंज थाना क्षेत्र में दो युवक कांग्रेस नेताओं ने पीडब्ल्यूडी के एक ठेकेदार से अड़ी डालकर दो लाख रुपए की मांग की थी। इस मामले में पुलिस ने ठेकेदार की रिपोर्ट पर दोनों युवक कांग्रेस नेताओं के खिलाफ धारा 384 के तहत अड़ीबाजी का मामला दर्ज किया है। मामले में दोनों कांग्रेस नेताओं की गिर तारी नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार नसरुल्लागंज के मुस्लिम मोहल्ले में रहने वाले फारुख खान युवा कांग्रेस जिला प्रतिनधि हैं तथा इंदौर रोड निवासी गोपाल शर्मा लोकसभा प्रतिनिधि हैं। इन दोनों ने ओल्ड सुभाष नगर भोपाल निवासी पीडब्ल्यूडी ठेकेदार प्रदीप कुमार जैन के मोबाइल पर 16 दिसंबर को फोन लगाकर मिलने की बात कही। शाम चार बजे मिलना तय हुआ, उसी दिन पांच बजे के लगभग स्थानीय रेस्टहाऊस में तीनों की मुलाकात हुई। तब दोनों युवक कांग्रेस नेताओं ने ठेकेदार प्रदीप कुमार जैन से कहा कि तुम टीकामोड़ से मंगरोल सड़क निर्माण में अनियमितताएं बरत रहे हो, यदि तुमने दो लाख रुपए नहीं दिए तो तु हारी शिकायत करेंगे। उस समय ठेकेदार श्री ैजैन ने पैसे देने से इंकार कर दिया और इन्हें चलता किया। 17 दिसंबर को दस बजे के लगभग इन दोनों कांग्रेस नेताओं ने पुन: ठेकेदार प्रदीप कुमार जैन के मोबाइल पर फिर पैसे देने की बात कही और नहीं देने पर किसी भी मामले में फंसा देने की धमकी दी। लगातार मिल रही धमकियों से परेशान ठेकेदार ने नसरुल्लागंज थाना पुलिस के पास पहुंचकर मामले में शिकायत की। पुलिस ने ठेकेदार की शिकायत पर दोनों कांग्रेस नेताओं के खिलाफ अड़ीबाजी का मामला दर्ज कर विवेचना शुरु कर दी है।

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

वाहन सुधारने से पहले होंगे नाम पते दर्ज


सीहोर। वाहन चोरी को रोकने के लिए पुलिस ने नया फरमान जारी किया है। मेकेनिक की दुकानों पर सुधरने के लिए आने वाले वाहन के नंबर और उसे लाने वाले व्यक्ति का नाम पता बकायदा एक रजिस्टर में मेकेनिक को ही दर्ज करना होगा। ऐसा नहीं करने पर पुलिस मेकेनिक के खिलाफ कार्रवाई करेगी। जिले में वाहन चोरी की लगातार हो रही वारदातों से परेशान पुलिस ने वाहनों की चेंकिग के अलावा अब मेकेनिक की दुकानों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मेकेनिक की दुकानों पर सुधरने आने वाले वाहनों के नंबर सहित उनके मालिकों को के नाम पते एवं एक रजिस्टर में दर्ज किए जाने के निर्देश दुकान मालिकों को दिए गए उन्हें समझाइश दी गई कि वे उनकी दुकान पर आने वाले सभी प्रकार के वाहनों का नंबर, कंपनी का नाम और किसके नाम रजिस्ट्रेशन तथा वाहन सुधरने कौन लाया यह सब जानकारी रखते हैं तो पुलिस की मदद हो सकेगी।
मेकेनिकों की परेशानी बढ़ी
मेकेनिकों की दुकानों पर आने वाले ग्राहकों में कुछ ग्राहक जिले से बाहर या तहसील से बाहर के होते हैं ऐसे में मेकेनिक यदि उनका नाम पता पूछता है तो उन्हें संदेह उत्पन्न होगा और वह अपना वाहन सुधरवाने में आनाकानी करने लगेंगे। इस तरह मेकेनिकों की ग्राहकी पर असर पड़ेगा और उनकी परेशानी ओर बड़ जाएगी।
होगा लंबा रिकार्ड
मेकेनिकों की दुकानों पर एक दिन अनेक ग्राहक आते हैें सभी के नाम पते लिखने पर एक माह में इनकी संख्या हजारों के पार हो जाएगी और यदि पुलिस किसी मामले में सभी मामलों में मेकेनिकों के रिकार्ड की जांच करेगी तो काफी समय लगेगा और मेकेनिक जबाव देते रहेंगे।
उलझन में नहीं पड़ना चाहते
पुलिस के इस नए फरमान से मेकेनिक उलझन में आ गए चूंकि ग्राहकों के नाम पते देकर वह पुलिस से तो भले हो जाएंगे लेकिन कई ग्राहकों के लिए उनके रिकार्ड रखना मुसीबत बन जाएगा चूंकि पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। ऐसे में कोई भी मेकेनिक पुलिस की उलझनों में नहीं पड़ना चाहता है।

फोन आने से पहले गिरफ्तारी करो

सीहोर। पुलिस के कामकाज में बढ़ते राजनैतिक हस्ताक्षेप से उसकी छवि लगातार जनता के बीच बिगड़ रही हेै ओर आम आदमी का विश्वास पुलिस के प्रति कम हो रहा है। पुलिस अधीक्षक केबी शर्मा ने इस पर चिंता जाहिर की और उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को फोन आने से पहले आरोपियों की गिरफ्तारी करने के मौखिक आदेश दिए हैं।
गौरतलब है कि हर माह होने वाली क्राइम बैठक में जिले में घटित होने वाले अपराध और महकमे के कामकाज को लेकर पुलिस अधीक्षक अपनी अधिनिस्थों से चर्चा करते हैं। बीते दिन पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित क्राइम बैठक में पुलिस अधीक्षक केबी शर्मा ने पुलिस के कामकाज में बढ़ते राजनैतिक हस्ताक्षेप को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की। उन्होंने कहा कि राजनैतिक हस्ताक्षेप के चलते पीड़ित पक्ष को सही न्याय नहीं मिल पाता है और आरोपियों को न चाहते हुए भी लाभ दिया जाता है। इसलिए फोन आने से पहले ही तत्काल आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए जिससे कि दबाव की गुंजाइश शेष न रहे।
जावर टीआई को फटकार
थानों की समीक्षा के दौरान पुलिस अधीक्षक ने जावर थाना प्रभारी मनीष घनघोरियां को फटकर लगाई बताया जाता है कि बीते दिनों जावर थाना क्षेत्र में अवैध वियर का मामला चर्चा में था इसी मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक ने श्री घनघोरियां को कामकाज में सुधार लाने की हिदायत दी है।
शिकायतें तत्काल निपटाएं
पुलिस अधीक्षक श्री शर्मा ने बैठक में मौजूद अधीनस्थ अधिकारियों को निदेर्शित कि या कि शिकायतों को तत्काल निपटाया जाए जिससे की शिकायत कर्ता को सही समय पर न्याय मिल सके और थानों में आने वाले लोगों का पुलिस के प्रति विश्वास बढ़े।

रविवार, 11 दिसंबर 2011

'मध्यप्रदेश के लोगों के दिल में बसता है संगीत'





श्रवण मावई
भोपाल/सीहोर। राजस्थान में यदि संगीत लोगों के खून में हैं तो मध्यप्रदेश के लोगों के दिल में संगीत बसता है यहां के लोग कलाकार की भावना को समझते हैं और उसकी कद्र करते हैं। मुझे यहां से बहुत प्यार मिला है। यह बात इंडियन आइडिल-5 के टॉप थ्री में रहे स्वरूप खान ने प्रदेश टुडे को दिए साक्षात्कार में कहीं।
राजस्थान के जैसलमेर जिले के छोटे से गांव बईया में जन्म लेने वाले बीस वर्षीय इस कलाकार की आवाज का जादू पूरे देश में चल रहा है लेकिन इनकी सहजता इन्हें और बढ़ा कलाकार बनाती है। सिर पर पगड़ी और मन में राजस्थानी लोक गीत को अपनी पहचान बताने वाले स्वरूप खान अपने को स्वरूप मंगयार कहलाना पसंद करते हैं। चूंकि मंगलयार उनकी समाज का नाम है। दरअसल स्वरूप खान एक कार्यक्रम में शामिल होने शनिवार को भोपाल और सीहोर आए थे।
मध्यप्रदेश ने बहुत प्यार दिया
स्वरूप बताते हैं कि मध्यप्रदेश ने इंडियल आइडिल के दौरान उन्हें बहुत प्यार दिया राजस्थान के अलावा उन्हें मध्यप्रदेश से भी अधिक वोट मिले जिसकी बदोलत वे टॉप थ्री तक पहुंचे। े संगीत के लिए अच्छी जगह
स्वरूप मंगलयार का मानना है कि भोपाल और सीहोर ऐसी जगह है जहां पर अच्छा संगीत बनाया जा सके। इस बात से उनका आशय यह है कि भोपाल का ताल और सुंदरता में अच्छा संगीत बनाने का माहौल है। साथ ही सीहोर में शांति है और ये दोनों ही परिस्थितियां संगीत को जन्म देने के लिए पर्याप्त है। न पढऩे का दुख
युवाओं के बीच लोक प्रिय स्वरूप खान को आज न पढऩे का दुख है वे बताते हैं कि वह केवल चौथी कक्षा तक पढ़े हैं। उन्हें इंग्लिश बात करने में परेशानी आती है, लेकिन वे चाहते हैं कि राजस्थान के बच्चें पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दे खास तौर पर उनके समाज के बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा जोर देते हैं।
भगवान है संगीत
जैसे कि मेरे लिए मां बाप भगवान तुल्य है ठीक वैसे ही संगीत मेरे लिए भगवान है और में केवल उनकी आराधना करता हूं।
फोक तो बजेगा ही
कोलाबेरी जैसे गीत को लेकर स्वरूप खान का कहना है कि आजकल धूम धड़ाके वाले गाने पसंद किए जा रहे हैं लेकिन वह फोक जिंदा रखना चाहते हैं और असली संगीत फोक ही है इसलिए चाहे पार्टी पॉप की हो पर वह उनके कार्यक्रम की शुरूआत फोक गीत से ही करते हैं।
सलमान के लिए गाऊं
फिल्मी गानें गाने में मजा भी आ रहा है लेकिन इच्छा है कि सलमान खान के लिए गाऊं मुझे वह बहुत पसंद है।
कलाकार बराबर
फिल्म इंडस्ट्री में कलाकार सब बराबर है में छोटे से गांव से हूं बावजूद इसके मुझे बड़े कलाकार काफी सम्मान देते हैं। वह के लोग कला को देखते हैं न कि शहर, जात-पात या औहदा।
पसंदीदा गानें
स्वरूप खान किसी भी कार्यक्रम में दो गीत अवश्य गाते हैं सुफियाना अंदाज का ख्वाजा मेरे ख्वाजा और राजस्थान का लोकगीत केसरिया बालम, उनका कहना है कि कार्यक्रम में चाहे कैसे भी श्रोता हो लेकिन यह दोनों ही गीत सबको भाते हैं ओर दोनों मेरे दिल के करीब है।
अच्छा लगता है अपनी पहचान होना
स्वरूप कहते हैं कि पहले पहचानें नहीं थी लेकिन अब सब जानते पहचानते हैं अच्छा लगता है जब मेरे माता पिता को मेरे नाम से लोग पहचानते है ।

मन भावे माहरो हिरदेश...
स्वरूप जिस गांव में रहते हैं वह के लोग जजमानों के लिए गाते हैं जजमान का जो नाम होता है वहीं नाम पर वह उसी समय गीत बनाते हैं और सुनने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। ठीक वैसे ही उन्होंने प्रदेश टुडे के सीएमडी हिरदेश दीक्षित के लिए गीत गाया मन भावे रे बड़ा प्यार लागे रे माहरो हिरदेश, मन भावे रे तारे चांद लागे रे माहरो हिरदेश...

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

ऑफ लाइन हुआ रोजगार आफिस


सीहोर। जिला रोजगार कार्यालय की व्यवस्थाएं पिछले तीन माह से महज दस हजार रुपए के कारण ठप पड़ी हैं। कार्यालय में कामकाज नहीं होने के कारण कर्मचारी खासे परेशान हैं वहीं अधिकारी विहीन कार्यालय में पहुंच रहे लोग भी महज पूछताछ कर वापस लौट रहे हैं।
प्रदेश सरकार के सभी कार्यालय हाइटेक हो चुके हैं। इन कार्यालयों में कामकाज भी इंटरनेट के जरिए ही ऑन लाइन संपन्न किए जा रहे हैं। दूसरी ओर तीन महीने से जिला रोजगार कार्यालय का ब्राडबैंड कनेक्शन का भुगतान नहीं होने के कारण बंद पड़ा है। बताया जाता है कि कार्यालय के ब्राडबैंड कनेक्शन का बिल 10 हजार रुपए से अधिक बकाया है। जिसके चलते भारत संचार निगम लिमिटेड ने रोजगार कार्यालय का कनेक्शन काट दिया है। ब्राडबैंड बंद होने के कारण कार्यालय का ऑन लाइन संपर्क कट गया है। पिछले तीन माह से यहां के कर्मचारी जानकारियों को ऑनलाइन अद्यतन नहीं कर पा रहे हैं।
क्या है इंटरनेट का विभागीय उपयोग?
मप्र सरकार द्वारा समस्त विभागों को ऑन लाइन किए जाने के तहत जिला रोजगार कार्यालयों को ऑन लाइन एमप्लॉयमेंट एक्सचेंज(ओलेक्स) के जरिए जोड़ा गया है। इसके तहत ऑन लाइन रोजगार पंजीयन, स्वरोजगार योजनाएं, विभिन्न आवेदन पत्र, औद्योगिक संपर्क, रोजगार मेले, कॅरियर काउंसलिंग आदि के बारे में जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध कराई जाती है। इन सूचनाओं को संबंधित जिला रोजगार कार्यालय से प्रतिदिन अपडेट किया जाता है। इसके अलावा विभाग द्वारा समय-समय पर जारी शासकीय आदेश, विभागीय पत्र, कर्मचारियों से संबंधित स्थानांतरण, प्रमोशन आदि की सूचियां भी ऑन लाइन ही प्रतिदिन अपडेट की जाती हैं। इसके अलावा जिला मु यालयों से समय-समय पर चाही गई जानकारियां भी ई-मेल के जरिए प्रधान कार्यालय को प्रेषित की जाती हैं। इंटरनेट कनेक्शन बंद हो जाने के कारण पिछले तीन माह से जिला मु यालय के काम काज की ऑन लाइन फीडिंग नहीं हो पा रही है।
लिए जा रहे सिर्फ आवेदन
जिला रोजगार कार्यालयों में ऑन लाइन पंजीयन की व्यवस्था है। यहां जो भी ििशक्षत बेरोजगार पंजीयन कराने के लिए आता है, उसका आवेदन लेने के बाद संपूर्ण जानकारी ऑनलाइन फीड की जाती है। इसके बाद पंजीयनकर्ता को एक विशेष पहचान नंबर और ग्रेड प्रदान किया जाता है। आवेदक को दिए गए पंजीयन प्रमाण पत्र में यह दोनों की जानकारियां दर्ज की जाती हैं। यह पहचान नंबर और ग्रेड ही सबसे महत्वपूर्ण होता है। ग्रेडिंग के आधार पर ही विभाग द्वारा समय-समय पर रोजगार के लिए सूचना पत्र भेजे जाते हैं। पिछले तीन माह से ऑनलाइन आवेदन नहीं होने के कारण यहां आने वाले आवेदनों को लेकर रखा जा रहा है। ग्रेडिंग व पंजीयन नंबर के लिए युवाओं को परेशान होना पड़ रहा है।
इनका कहना है
इस संबंध में जिला रोजगार कार्यालय के प्रभारी और लेखापाल बीके उइके ने बताया कि बीएसएनएल द्वारा भेजे गए सभी बिलों का प्रतिमाह भुगतान किया जाता रहा है। इसके बाद भी दस हजार रुपए का बिल बकाया हो गया है। इसमें कुछ राशि लेटफीस आदि की भी है। बिल जमा कराने के लिए अतिरिक्त आवंटन के लिए आवेदन दिया है, जिसकी स्वीकृति भी हो गई है। जिला कोषालय से ई-पेमेंट के जरिए बीएसएनएल को जल्द ही भुगतान हो जाएगा। इसके बाद काम सुचारु रूप से चल सकेगा।
अधिकारी विहीन है कार्यालय
करीब तीन माह पहले जिला रोजगार अधिकारी श्रीमती वर्मा का स्थानांतरण हो गया है। यहां किसी अधिकारी की पदस्थापना नहीं की जा सकी है। कार्यालय की व्यवस्थाओं को चलाने के लिए भोपाल कार्यालय के एमके दुबे को सीहोर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। श्री दुबे भी खास मौकों पर ही यहां आते हैं। बाकी समय में कार्यालय की समस्त जि मेदारियों का निर्वाहन लेखापाल बीके उइके और लिपिक श्री राठौर द्वारा ही किया जा रहा है। गौरतलब है कि जिला मु यालय पर कई विभागों का कामकाज प्रभारियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। अनेक विभागों में अधिकारियों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। जिला रोजगार अधिकारी के पद पर स्वतंत्र अधिकारी के पदासीन नहीं होने के कारण रोजगार मेले आदि के भी आयोजन नहीं हो पा रहे हैं, जबकि पूर्व में कई मेले यहां आयोजित हुए हैं।

प्रभारी मंत्रियों की घोषणा, शाह सीहोर प्रभारी


सीहोर। सीएम ने जिले के प्रभारी मंत्रियों की घोषणा आज शाम की है जिसमें सीहोर का प्रभार विजय शाह को सौंपा गया है। इनके अलावा गोपाल भागर्व इंदौर, सरताज सिंह बैतूल, नरोत्तम मिश्रा ग्वालियर, जगदीश देवड़ा देवास, अजय विश्वनोई रीवा, लक्ष्मीकांत शर्मा शाजापुर के प्रभारी बनाए गए हैं।

भोपाल कमीशनर के साथ कलेक्टर सीहोर


सीहोर। भेापाल में कमीशनर मनोज श्री वास्तव के साथ वीडियों कान्फेंसिं्रग में चर्चा के दौरान मौजूद कलेक्टर सीहोर डॉ संजय गोयल और कलेक्टर भोपाल निकुंज श्रीवास्तव।

काले हिरण शिकार के मामले में चार आरोपी गिरफ्तार फंदा और मास बरामद

सीहोर। लाड़कु ई क्षेत्र के इटावा और बडऩगर के जंगल में एक काले हिरण का शिकार कर उसके मांस को पकाने की तैयारी कर रहे चार लोगों को वन विभाग के अधिकारियों ने पकड़ा है। इनके खिलाफ वन प्राणी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। लाड़कुई रेंजर विजय सिंह तोमर ने बताया कि ग्राम गिलहरी के रहने वाले रमेश पिता छीतरनाथ 45 वर्ष उसका भाई कैलाश पिता छीतरनाथ 35 वर्ष, मुरारी पिता छीतरनाथ 25 वर्ष और विजेश पिता सुरेश नाथ 20 वर्ष अपने बाड़े में काले हिरण का मांस पकाने की तैयारी कर रहे थे तभी मुखबिर से सूचना मिलने पर छापा मारा गया मौके से काले हिरण का 6 किलो मांस और शिकार करने के उपयोग में आना वाला फंदा भी बरामद हुआ है। चारों आरोपियों ने इटावा-बडऩगर के जंगल से शिकार किया था और उसे खाने के लिए अपने बाड़े में लाकर पका रहे थे। इनके खिलाफ वन प्राणी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपियों को पकडऩे में नसरूल्लागंज रेंजर अविनाश जोशी, लाड़कुई रेंजर विजय सिंह तोमर, वन रक्षक सलीम बेग, आशीष श्रीवास्तव, विनोद यादव, सुमन आर्य और वीवी सिंह की सक्रिय भूमिका रही।

घूड़े पर मिली बच्ची के मिले कुंवारे मां-बाप

सीहोर। इछावर तहसील क्षेत्र के ग्राम रामदासी में बुधवार की सुबह घूड़े पर मिली बच्ची के मां बाप मिल गए हैं और यह दोनों ही कुंवारे हैं। यह बच्ची इन दोनों के प्रेम की निशानी है पुलिस ने इन दोनों को ही गिरफ्तार कर लिया है।

बदनामी के डर से कुए में कूद गई

सीहोर। किशोर अवस्था का प्रेम न समझ तो होता ही है और इस न समझी में ऐसे कदम उठ जाते हैं कि इनके परिणाम न केवल प्रेम करने वालों में बल्कि परिजनों को भी भुगतने पड़ते हैं। ऐसा ही एक मामला अहमदपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हिनौती में हुआ है।
खेतों में खड़ी गेहूं, चने की फसल की हरियाली मन को आकर्षित कर रही है वहीं इस हरियाली के चलते कोमल मन भी एक दूसरे की ओर आकर्षित किया। 14 वर्ष की एक लड़की को 17 वर्ष के एक लड़के से प्रेम हुआ दोनों अपने खेतों में काम करने के बहाने एक दूसरे भी मिला करते थे। इसी दौरान उनका प्रेम भटक गया चूंकि उम्र न समझी की थी और जब वह मर्यादा की हदें पार कर रहे थे तब ग्राम में ही रहने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें देख लिया उस समय तो लड़का और लड़की दोनों चले गए लेकिन लड़की बदनामी की डर से घर जाने की बजाय सीधे कुए में जा कूदी।
इधर लड़की की गुम होने की सूचना अहमदपुर थाना पुलिस को दी गई पुलिस परिजनों के साथ मिलकर लड़की को ढूंढती रही लड़की के परिजन लड़के पर लड़की को भगाने के आरोप मढ़ते रहे पर बुधवार की देर शाम ग्राम के एक कुए से लड़की की लाश मिलने की सूचना पुलिस को मिली। गुरूवार की सुबह पुलिस ने लाश कुए से निकाला और पीएम के लिए भेज दिया। प्राथमिक दृष्टि में मामला आत्महत्या का माना जा रहा है चूंकि मृतिका के शरीर पर न तो कोई चोट के निशान है और न ही गले पर किसी दबाव के, इधर पुलिस ने लड़के को गिरफ्तार कर लिया है उसने पूछताछ में बताया कि वह पूरे समय अपने घर पर ही था। उसकी प्रेमिका जबसे घर ही नहीं लोटी जब उसे उसके साथ बद्रीप्रसाद नामक व्यक्ति ने संदिग्ध अवस्था में देखा था।

बुधवार, 7 दिसंबर 2011

कठघरे में पत्रकार

अंडरवर्ल्ड के कठघरे में एक पत्रकार मारा गया। और मारे गये पत्रकार को अंडरवर्ल्ड की बिसात पर प्यादा भी एक दूसरे पत्रकार ने बनाया। और सरकारी गवाह भी एक तीसरा पत्रकार ही बना। यानी अंडरवर्ल्ड से जुड़ी खबरों को नापते-जोखते पत्रकार कब अंडरवर्ल्ड के लिये काम करने लगे यह पत्रकारों को पता ही नहीं चला। या फिर पत्रकारीय होड़ ही कुछ ऐसी बन चुकी है, जिसमें पत्रकार अगर खबर बनते लोगों का हिस्सा नहीं बनता तो उसकी विश्नसनीयता नहीं होती। यह सवाल ऐसे मौके पर सामने आया है जब मीडिया की विश्वसनीयता को लेकर सवाल और कोई नहीं प्रेस काउंसिल उठा रहा है। और पत्रकार को पत्रकार होने या कहने से बचने के लिये मीडिया शब्द से ही हर कोई काम चला रहा है, जिसे संयोग से इस दौर में इंडस्ट्री मान लिया गया है और खुले तौर पर शब्द भी मीडिया इंडस्ट्री का ही प्रयोग कया जा रहा है।
तो मीडिया इंडस्ट्री पर कुछ कहने से पहले जरा पत्रकारीय काम को समझ लें। जो मुंबई में मिड डे के पत्रकार जे डे की हत्या के बाद एशियन ऐज की पत्रकार जिगना वोरा की मकोका में गिरफ्तारी के बाद उठा है। पुलिस फाइलों में दर्ज नोटिंग्स बताती हैं कि मिड डे के पत्रकार जे डे की हत्या अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन ने इसलिये करवायी क्योंकि जे डे छोटा राजन के बारे में जानकारी अंडरवर्ल्ड के एक दूसरे डॉन दाउद इब्राहिम को दे रहा था। एशियन ऐज की पत्रकार जिगना वोरा ने छोटा राजन को जेडे के बारे में फोन पर जानकारी इसलिये बिना हिचक दी क्योंकि उसे अंडरवर्ल्ड की खबरों को बताने-दिखाने में अपना कद जेडे से भी बड़ा करना था। दरअसल, पत्रकारीय हुनर में विश्वसनीयता समेटे जो पत्रकार सबसे पहले खबर दे दे, उसका कद बड़ा माना ही जाता है। जब मलेशिया में छोटा राजन पर जानलेवा हमला हुआ और हमला दाउद इब्राहिम ने किया तो यह खबर जैसे ही अखबार के पन्नो पर जेडे ने छापी तो समूची मुंबई में करंट दौड़ पड़ा। क्योंकि अंडरवर्ल्ड की खबरों को लेकर जेडे की विश्वसनीयता मुंबई पुलिस और खुफिया एजेंसियों से ज्यादा थी। और उस खबर को देखकर ही मुंबई पुलिस से लेकर राजनेता भी सक्रिय हुये। क्योंकि सियासत के तार से लेकर हर धंधे के तार अंडरवर्ल्ड से कहीं ना कहीं मुबंई में जुड़े हैं। यानी अंडरवर्ल्ड से जुड़ी कोई भी खबर मुंबई के लिये क्या मायने रखती है और अंडरवर्ल्ड की खबरों को बताने वाले पत्रकार की हैसियत ऐसे में क्या हो सकती है, यह समझा जा सकता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यहीं से खड़ा होता है कि पत्रकार जिस क्षेत्र की खबरों को कवर करता है क्या उसकी विश्वसनीयता का मतलब सीधे उसी संस्थान या व्यक्तियों से सीधे संपर्क से आगे का रिश्ता बनाना हो जाता है। या फिर यह अब के दौर में पत्रकारीय मिशन की जरुरत है। अगर महीन तरीके से इस दौर के पत्रकारीय मिशन को समझें तो सत्ता से सबसे ज्यादा निकट पत्रकार की विश्वसनीयता सबसे ज्यादा बना दी गई है। यह सत्ता हर क्षेत्र की है। प्रधानमंत्री जिन पांच संपादकों को बुलाते है, अचानक उनका कद बढ़ जाता है। मुकेश अंबानी से लेकर सुनील मित्तल सरीखे कारपोरेट घरानो के नये वेंचर की जानकारी देने वाले बिजनेस पत्रकार की विश्वसनीयता बढ़ जाती है। मंत्रिमंडल विस्तार के बारे में पहले से जानकारी देने और कौन मंत्री बन सकता है, इसकी जानकारी देने वाले पत्रकार का कद तब और बढ़ जाता है, जब वह सही होता है। लेकिन क्या यह संभव है कि जो पत्रकार ऐसी खबरे देते हैं, वह उस सत्ता के हिस्से न बने हों, जहां की खबरों को जानना ही पत्रकारिता के नये मापदंड हों। और क्या यह भी संभव है जब कॉरपोरेट या राजनीतिक सत्ता जिस पत्रकार को खबर देती हो उसके जरीये वह अपना हित पत्रकार की इसी विश्सवनीयता का लाभ न उठा रही हो। और पत्रकार सत्ता के जरीये अपने हुनर को तराशने से लेकर खुद को ही सत्ता का प्रतीक ना बना रहा हो।
यह सारे सवाल इसलिये मौजूं हैं क्योंकि राजनीतिक गलियारे में कॉरपोरेट दलालों के खेल में पत्रकार को कॉरपोरेट कैसे फांसता है, यह राडिया प्रकरण में खुल कर सामने आ चुका है। यहां यह सवाल खड़ा हो सकता है कि एशियन ऐज की पत्रकार जिगना वोरा पर तो मकोका लग जाता है क्योंकि अंडरवर्ल्ड उसी दायरे में आता है, लेकिन राजनीतिक सत्ता और कॉरपोरेट के खेल में कभी किसी पत्रकार के खिलाफ कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं होती। क्या सत्ता को मिले विशेषाधिकार की तर्ज पर सत्ता से सटे पत्रकारों के लिये भी यह विशेषाधिकार है।
दरअसल, पत्रकारीय हुनर की विश्वसनीयता का ही यह कमाल है कि सत्ता से खबर निकालते निकालते खबरची भी अपने आप में सत्ता हो जाते हैं। और धीरे धीरे खबर कहने-बताने का तरीका सरकारी नीतियों और योजनाओं को बांटने में भागेदारी से जा जुड़ता है। यह हुनर जैसे ही किसी रिपोर्टर में आता है, उसे आगे बढ़ाने में राजनेताओं से लेकर कॉरपोरेट या अपने अपने क्षेत्र के सत्ताधारी लग जाते हैं। और यहीं से पत्रकार का संपादकीकरण होता है जो मीडिया इंडस्ट्री का सबसे चमकता हीरा माना जाता है । और यहां हीरे की परख खबरों से नहीं मीडिया इंडस्ट्री में खड़े अपने मीडिया हाउस को आर्थिक लाभ दिलाने से होता है। यह मुनाफा मीडिया हाउस को दूसरे धंधों से लाभ कमाने की तरफ भी ले जाता है और दूसरे धंधे करने वालों को मीडिया हाउस के धंधे में ला कर काली समझ को विश्वसनीय होने का न्यौता भी देता है।
हाल के दौर में न्यूज चैनलों का लाइसेंस जिस तरह चिट-फंड करने वाली कंपनियो से लेकर रियल-इस्टेट के धुरंधरों को मिला, उसकी नब्ज कैसे सत्ता अपने हाथ में रखती है या फिर इन मालिकान के न्यूज चैनल में पत्रकारिता का पहला पाठ भी कैसे पढ़ा जा सकता है, जब लाइसेंस पाने की कवायद में समूची सरकारी मशीनरी ही फ्रॉड तरीके से चलती है। मसलन लाइसेंस पाने वालो की फेरहिस्त में वैसे भी हैं, जिनके खिलाफ टैक्स चोरी से लेकर आपराधिक मामले तक दर्ज हैं। लेकिन पैसे की कोई कमी नहीं है और सरकार के जो नियम पैसे को लेकर लाइसेंस पाने के लिये चाहिये उसमें वह फिट बैठते है, तो लोकतांत्रिक देश में किसी भी नागरिक को यह अधिकार है कि वह कोई भी धंधा कर सकता है। लेकिन यह परिस्थितियां कई सवाल खड़ा करती हैं, मसलन पत्रकारिता भी धंधा है। धंधे की तर्ज पर यह भी मुनाफा बनाने की अर्थव्यवस्था पर ही टिका है। या फिर सरकार का कोई फर्ज भी है कि वह लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को बनाये-टिकाये रखने के लिये पत्रकारीय मिशन के अनुकुल कोई व्यवस्था भी करे।
दरअसल इस दौर में सिर्फ तकनीक ही नहीं बदली या तकनीक पर ही पत्रकार को नहीं टिकाया गया बल्कि खबरों के माध्यम में विश्वसनीयता का सवाल उस पत्रकार के साथ जोड़ा भी गया और वैसे पत्रकारो का कद महत्वपूर्ण भी बनाया गया जो सत्तानुकुल या राजनेता के लाभ को खबर बना दें। अखबार की दुनिया में तो पत्रकारीय हुनर काम कर सकता है। लेकिन न्यूज चैनलों में कैसे पत्रकारीय हुनर काम करेगा, जब समूचा वातावरण ही नेता-मंत्री को स्टूडियो में लाने में लगा हो। अगर अंग्रेजी के राष्ट्रीय न्यूज चैनलों की होड को देखे तो प्राइम टाइम में वही चैनल या संपादक बड़ा माना जाता है, जिसके स्क्रीन पर सबसे महत्वपूर्ण नेताओ की फौज हो। यानी मीडिया की आपसी लड़ाई एक दूसरे को दिखाने बताने के सामानांतर विज्ञापन के बाजार में अपनी ताकत का एहसास कराने का ही है। यानी इस पूरी प्रक्रिया में आम दर्शक या वह आम आदमी है कहां, जिसके लिये पत्रकार ने सरोकार की रिपोर्टिंग का पाठ पढ़ा था। पत्रकारिता को सरकार पर निगरानी करने का काम माना गया। लोकतांत्रिक राज्य में चौथा स्तंभ मीडिया को माना गया । अगर खुली बाजार व्यवस्था में पत्रकारिता को भी बाजार में खुला छोड कर सरकार यह कहे कि अब पैसा है तो लाइसेंस लो। पैसा है तो काम करने का अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाओ । और अपने प्रतिद्दन्दी चैनलों से अपनी तुलना मुनाफा बनाने या घाटे को कम करने के मद्देनजर करो। ध्यान दीजिये तो मीडिया का यही चेहरा अब बचा है। ऐसे में किसी कारपोरेट या निजी कंपनी से इतर किसी मीडिया हाउस की पहल कैसे हो सकती है। और अगर नहीं हो सकती है तो फिर चौथे खंभे का मतलब है क्या। सरकार की नजर में मीडिया हाउस और कारपोरेट में क्या फर्क होगा। कॉरपोरेट अपने धंधे को मीडिया की तर्ज पर क्यो नहीं बढ़ाना-फैलाना चाहेगा। मसलन सरकार कौन सी नीति ला रही है। कैबिनेट में किस क्षेत्र को लेकर चर्चा होनी है। पावर सेक्टर हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर या फिर कम्यूनिकेशन हो या खनन से सरकारी दस्तावेज अगर वह पत्रकारीय हुनर तले चैनल की स्क्रीन या अखबार के पन्नों पर यह ना बता पायें कि सरकार किस कारपोरेट या कंपनी को लाभ पहुंचा रही है, तो फिर पत्रकार क्या करेगा।
जाहिर है सरकारी दस्तावेजों की भी बोली लगेगी और पत्रकार सरकार से लाभ पाने वाली कंपनी या लाभ पाने के लिये बैचेन किसी कॉरपोरेट हाउस के लिये काम करने लगेगा। और राजनेताओं के बीच भी उसकी आवाजाही इसी आधार पर होने लगेगी। संयोग से दिल्ली और मुबंई में तो पत्रकारों की एक बडी फौज मीडिया छोड़ कारपोरेट का काम सीधे देखने से लेकर उसके लिये दस्तावेज जुगाड़ने तक में लगी है। यह परिस्थितियां बताती हैं कि मीडिया हाउस की रप्तार निजि कंपनी से होते हुये कारपोरेट बनने की ही दिशा पकड़ रही है और पत्रकार होने की जरुरत किसी कॉरपोरेट की तर्ज पर मीडिया हाउस को लाभ पहुंचाने वाले कर्मचारी की तरह होता जा रहा है। और ऐसे में प्रेस काउंसिल मीडिया को लेकर सवाल खड़ा करता है तो झटके में चौथा खम्भा और लोकतंत्र की परिभाषा हर किसी को याद आती है। लेकिन नयी परिस्थितियों में तो संकट दोहरा है। सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होते ही जस्टिस काटजू प्रेस काउंसिल के चैयरमैन बन जाते है और अदालत की तरह फैसले सुनाने की दिशा में बढ़ना चाहते हैं। वहीं उनके सामने अपने अपने मीडिया हाउसों को मुनाफा पहुंचाने या घाटे से बचाने की ही मशक्कत में जुटे संपादकों की फौज खुद ही का संगठन बनाकर मीडिया की नुमाइन्दी का ऐलान कर सरकार पर नकेल कसने के लिये प्रेस काउसिंल के तौर तरीको पर बहस शुरु कर देती है। और सरकार मजे में दोनो का साख पर सवालिया निशान लगाकर अपनी सत्ता को अपनी साख बताने से कतराती। ऐसे में क्या यह संभव है कि पत्रकारीय समझ के दायरे में मीडिया पर बहस हो। अगर नही तो फिर आज एशियन एज की जिगना वोरा अंडरवर्ल्ड के कटघरे में है, कल कई होंगे। आज राडिया प्रकरण में कई पत्रकार सरकारी घोटाले के खेल की बिसात पर है तो कल इस बिसात पर पत्रकार ही राडिया में बदलते दिखेंगे।

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

घुड़े पर मिली बिटिया



सीहोर। इछावर के ग्राम रामदासी में घुड़े पर नवजात बिटिया मिली है। इस बेेटी को मरा समझ कर घुड़े पर फेका गया है। अब इसका इलाज जिला अस्पाताल में चल रहा है।

कुर्क होगी जलसंसाधन विभाग की संपत्ति


सीहोर। विभाग में कार्यरत एक दैनिक वेतन भोगी के वेतन के वर्षो से लंबित एक लाख 55 हजार रुपए से कुछ अधिक के भुगतान को लेकर श्रम न्यायालय ने जलसंसाधन विभाग कार्यालय की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने के आदेश पारित किए हैं। बुधवार को यदि विभाग भुगतान की राशि नहीं जमा करता है तो उसकी संपत्ति को कुर्क किए जाना तय है।
कई वर्षो से जलसंसाधन विभाग में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में काम करने वाले अनिल दुबे ने अपने बकाया वेतन को लेकर श्रम न्यायालय में गुहार लगाई थी। सूत्रों की माने तो मजदूर को बिना किसी नोटिस के पद से विभाग द्वारा हटा दिया गया था, अपने बकाया वेतन को लेकर वह श्रम न्यायालय गया, जहां से श्रम न्यायालय क्रमांक-२ द्वारा आदेश क्रमांक ३१/एमपीआर/०२२७/२/०७ को आवेदक के हित में निर्णय पारित करते हुए रुपए 155698 रुपए का भुगतान करने के आदेश कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन विभाग को दिए। लेकिन इस आदेश के बाद भी भुगतान न होने पर आवेदक ने जिला कलेक्टर को गुहार लगाई। कलेक्टर सीहोर द्वारा अपने पत्र क्रमांक १५४/आरएम/२००८ दिनांक ११ अगस्त ०८ को तहसीलदार सीहोर को वसूली पत्र जारी किया गया, जिसके संदर्भ में श्रम न्यायालय द्वारा 18 जून १० को कुर्की आदेश दिए गए। लेकिन इसके बाद भी राशि का भुगतान न होने पर तहसीलदार सीहोर को कुर्की वारंट तामील कराने के आदेश दिए गए।
होगी कुर्की की कार्रवाई
तहसीलदार सीहोर अलका इक्का ने बताया कि न्यायालय से कुर्की वारंट प्राप्त हुआ है। इस कुर्की वारंट को तय तारीख पर तामील कराया जाएगा। कुर्की वारंट में विभाग की चल-अचल संपत्ति के रूप में दो जीपें, चार क प्यूटर सेट, गोदरेज की चार अलमारी, कुर्सी-टेबिल तीन नग बताई गई है।
टल सकती है कुर्की
जानकारी के अनुसार यदि बुधवार को जल संसाधन विभाग दैनिक वेतन भोगी के वेतन के 1 लाख 55 हजार रूपये देने के लिए राजी हो जाता है तो कुर्की की कार्रवाई टल सकती है अन्यथा कार्रवाई होगी।
एसडीओ पेशी पर और इन्हें जानकारी नहीं
इस मामले में जल संसाधन विभाग के ईई अविनाश कुलकर्णी ने मामले की जानकारी होने से इंकार कर दिया लेकिन मजे की बात यह है कि उन्हें के विभाग के एसडीओ लगातार श्रम न्यायालय में पेशी पर जाते रहे और इन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। सवाल यह उठता है कि इसे लापरवाही कहे या कोरा झूठ ?
क्या बोले अधिकारी
हमें ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं है, हम बुधवार को इसकी जानकारी प्राप्त करेंगे। फिलहाल इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
अविनाश कुलकर्णी, इई जलसंसाधन विभाग
कुर्की वारंट जारी हो गया है कुर्की की कार्रवाई बुधवार को होगी यदि जल संसाधन विभाग भुगतान की राशि जमा कर देता है तो कार्रवाई नहीं होगी और विभाग के ईई यदि इस मामले की जानकारी नहीं होने की बात कह रहे हैं तो वो गलत है। उनके एसडीओ लगातार कोर्ट में पेशी पर जाते रहे हैं तो उन्हें मामले की जानकारी होना लाजमी है।
अल्का इक्का, तहसीलदार सीहोर

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

पांच पकड़ाए, दो पुलिस गिरफ्त से बाहर आरोपियों में ठेकेदार भी षामिल



क्षेत्र में विगत 4 माह में 3 बड़ी लूट की घटनाओं को अंजाम देने बाले 7 सदस्यी लुटेरों के गिरोह में से 5 सदस्यों को पकड़नें में पुलिस ने सफलता प्राप्त कर ली है,वहीं गिरोह के दो सदस्य अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है।पकड़े गए आरोपियों से लूट में इस्तमाल करने बाले हथियार,नकदी व मोटरसाइकिल पुलिस ने बरामद की है।सोमवार को एसडीओपी प्रषांत चैवे ने लूट की बारदातों का खुलासा करते हुए बताया कि क्षेत्र में लूट की घटनाओं को अंजाम देने बाले आरोपीयों में षाहगंज निवासी रियाज खां,अषोक मेहरा,षोभापुर अजेरा निवासी अमर पटेल,होषंगाबाद जिले के ग्राम रायपुर निवासी रमेष गौर,नरंिसंहपुर निवासी करन ठाकुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है,वही गिरोह के सदस्य चांद खां निवासी षाहगंज व अनिल गिरी निवासी नसरूल्लागंज फरार,पकड़े गए आरोपियों ने एक अगस्त को समीपस्थ ग्राम परसबाड़ा के पास खटपुरा निवासी रविदास अहिरवार की नीली डिस्कवर मोटरसाइकिल एवं साथी का मोवाईल लूट कर चाकू मारकर घायल किया था।वहीं 5 सितम्बर को बुधनी रेहटी रोड पर उंचाखेड़ा के पास पिकअप से जा रहे सेल्समेन दीपक बंजारा को रोककर उसके पास से 60हजार रूपए छीन कर भाग गए थे।वहीं घटना के ठीक एक महिने बाद 5 अक्टूवर बुधनी षाहगंज रोड पर बक्तरा निवासी गोविन्द महेष्वरी का आटों रूकवाकर 34 हजार रूपए की लूट की थी।पकड़े गए आरोपी रियाज खां से लूट में इस्तमाल की गई डिस्कबर मोटरसाइकिल,एक315 बोर का कटटा 1जिंदा कारतूस के साथ बरामद किया,आरोपी अषोक मेहरा के पास32 बोर रिबाल्बर चार कारतूस के साथ बरामद किए एवं आरोपी रमेष गौर से लूटी हुई मोटरसाइकिल एवं घटना में प्रयुक्त किया गया चाकू बरामद किया।पकड़े गए आरोपीयों से लूटे गए 35 हजार रूपए भी पुलिस ने बरामद किए है।पुलिस की इस कार्रवाई में थाना प्रभारी दीपक पारासर,प्रधान आरक्षक ष्यामलाल,रामकृष्ण,आरक्षक विजय,सचिन,श्रीप्रकाष,जीवन,भीम सैनिक विष्णु प्रासद,चरण की अहम भूमिका रही।

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

आखिरकार वन कटाई के मिल गए सबूत जांच दल को मिले 98 ठूंठ मुख्य वनरक्षक को सौंपेंगे रिपोर्ट



सीहोर/शाहगंज। जिले में अवैध रूप से वन कटाई को लेकर गाहे-वगाहे खबरें आती रहती है, लेकिन इन खबरों पर पहली बार ध्यान दिया गया और दस सदस्यीय जांच दल शाहगंज के खटपुरा के जंगलों की खाक छानने पहुंचा दो दिन की जांच में 98 ठूठ मिले। जिससे यह साबित हो गया है कि जंगलों में अवैध कटाई चल रही है और वन अमला इसमें शामिल है। इस आशय की रिपोर्ट जांच दल प्रभारी आरके वर्मा मुख्य वन संरक्षक को सोमवार को सौंपेेंगे।
जंगलों में होने वाली अवैध कटाई पर वन विभाग की आला अधिकारियों में चिंता जाहिर की नतीजन शिकायत के बाद मुख्य वन संरक्षक ने दस सदस्यीय दल गुरूवार को शाहगंज तहसील के खटपुरा जंगलों में जांच के लिए भेजा गोपनीय रूप से यह जांच दल सीधे जंगल की और कूच कर गया पहले दिन दल को अवैध रूप से काटे गए पेड़ों के 34 ठूठ मिले जिससे यह बात यकीनन साबित हुई कि खटपुरा के जंगल में रात ओर दिन वन विभाग की मिली भगत से अवैध कटाई हो रही है इतना ही नहीं दूसरे दिन जांच दल महज आठ घंटे में 64 ठूठ जंगल में मिले अभी शनिवार को भी जांच दल जंगलों की जांच कर रहा है।
सोमवार को सौंपेगे रिर्पोट
जांच दल के प्रभारी आरके वर्मा ने बताया कि संपूर्ण जांच की रिपोर्ट वह सोमवार को मुख्य वन संरक्षक को सौंपेंगे उसके बाद इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
हजारों की संख्या में ठूेठ
खटपुरा का जंगल हजारों एकड़ भूमि पर फैला हुआ है जांच दल ने कुछ एकड़ में ही जांच की है जिसमें 98 ठेूठ मिले हैं जबकि पूरे जंगल की जांच की जाए तो ठंूठों की संख्या हजारों में होंगी। पिछले सालों में इस जंगल से बेहिसाब अवैध कटाई हुई है और अभी भी जारी है।
खुल गई ईमानदारों की पोल
जंगल कटाई को लेकर जब भी अधिकारियों पर सवाल उठते थे तो वह ईमानदारी का ढिढोंरा पीटने लगते थे लेकिन जांच दल को मिले ठूठों ने यह साफ कर दिया है कि जंगल की कटाई में अधिकारियों का हाथ निश्चित तौर पर है और इन अधिकारियों की ईमानदारी की पोल अब खुल गई है।
और भी है जंगल
जिले में खटपुरा के अलावा इछावर के नादान, लाड़कुई, नसरूल्लागंज, आष्टा के जंगलों की जांच भी होना चाहिए क्योंकि यह भी भी जंगल में अवैध कटाई की जा रही है।
इनका कहना है
शिकायत पर मुख्य वन संरक्षक ने दस सदस्यीय दल को खटपुरा में हो रही अवैध जंगल की कटाई के लिए भेजा था दो दिन की जांच में 98 ठंूठ पाए गए जांच की रिपोर्ट सोमवार को मुख्य वन संरक्षक को सौंपी जाएगी।
आरके वर्मा, जांच दल प्रभारी भोपाल

..... ओर जब लगी गैस फिलिंग प्लांट में आग

सीहोर। शनिवार की सुबह 10.40 मिनिट पर पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिलती है कि ग्राम तूमड़ा के नजदीक स्थित गैस फिलिंग प्लांअ में आग लग गई है सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम यह संदेश एडीशनल एसपी को दे देता है। एडीशनल एसपी सभी संबंधित थाना प्रभारियों को मौके पर पहुंचने के लिए निर्देशित करते हैं ओर खुद भी रवाना हो जाते हैं। वह पहुंचने पर यह पता चलता है कि मौक ड्रिल है।
पुलिस की सर्तकता और तत्परता की जांच के लिए होने वाली ड्रील से पुलिस अधिकारी शनिवार को अंजान थे ठीक 10.40 मिनिट पर पुलिस कंट्रोल रूम अचानक संदेश प्रसारित करता है कि तूमड़ा के नजदीक स्थित गैस फिलिंग प्लांट में आग लग गई है संदेश सुनने के बाद एडीशनल एसपी सुनील मेहता ने दोराहा, श्यामपुर चौकी, खजूरी थाना और कोतवाली थाना प्रभारियों को मौके पर पहुंचने के लिए निर्देश दिए निर्देश मिलने के बाद ही सर्वप्रथम खजूरी थाने में पदस्थ एसआई और श्यामपुर चौकी प्रभारी अलोक सोनी सहित फायर बिग्रेड वाहन पहुंचा 11.15 के लगभग एडीशनल एसपी सुनील मेहता भी मौके पर पहुंच गए उसके ठीक बाद कोतवाली थाना प्रभारी सतीश मेहलवाला भी पहुंचे। करीब आधे घंटे में घटना स्थल पर पुलिस अधिकारी और फायर बिग्रेड वाहन पहुंच गए। जो कि स्थल पर पहुंचने में सही समय था इस मौक ड्रिल यह बात सामने आई कि पुलिस अधिकारी सर्तक बने हुए हैं और किसी भी घटना दुर्घटना से निपटने के लिए वह तत्पर है।

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

पुरूष नर्स के साथ मारपीट

आष्टा। वार्ड में नर्स की कुर्सी पर बैठकर इलाज के कागजों को एवं अन्य शासकीय दस्तावेजों के पन्ने पलटने पर एतराज जताया तो तीन युवकों ने मिलकर सिविल अस्पताल में पदस्थ पुरूष नर्स विकास के साथ मारपीट की और फिर फरार हो गए। पुलिस ने विकास की रिपोर्ट पर तीनों आरोपियों के विरूद्ध मामला दर्ज किया है। इस घटना से एक बार फिर अस्पताल में पुलिस की मांग ने जोर पकड़ लिया है, लेकिन अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।
शुक्रवार की रात दस बजे के लगभग मजहर नामक बीमार को लेकर आए तीन युवकों में से एक युवक पुरूष वार्ड में मौजूद नर्स विकास की कुर्सी पर बैठ गया और फिर इलाज के पर्चे और अन्य दस्तावेजों के पन्ने पलटने लगा, इस पर विकास ने युवक से कहा कि वह इन दस्तावेजों को हाथ नही लगाए और साथ ही उसकी कुर्सी से उठे। इतना कहते ही कुर्सी पर बैठा युवक और उसके दो अन्य मददगार विकास के साथ मारपीट करने लगे। यह देख वार्ड में मौजूद लोगों एवं अन्य स्टॉफकर्मियों ने बीचबचाव किया। बाद में तीनों युवक भाग निकलें। विकास की रिपोर्ट पर पुलिस ने तीन आरोपियों के विरूद्ध मामला दर्ज किया है। इधर 45 दिन पूर्व सिविल अस्पताल में मौजूद पुलिस को हटा लिया गया है, नतीजा यह हो रहा है कि आए दिन अस्पताल में शराब पीकर हंगामा करने वाले तो अस्पताल को सराए समझकर रात्रि विश्राम करने वालों का समूह जमा हो जाता है। जो रात्रि को अस्पताल की व्यवस्था में तो बाधक बनता ही है, साथ ही मरीजों के लिए भी परेशानी का कारण बन जाता है। रोज-रोज के पंगों से तंग आकर अब जहां चिकित्सक इस मामले में कुछ भी बोलना नही चाहते, वहीं स्टॉफ के लोग भी अपने स्तर पर इस मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए है। कुल मिलाकर पुलिस की अनुपस्थिति के चलते अस्पताल में इस तरह के दृश्य आम होते जा रहे है।

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

स्कूलों में अधिनियम ताक पर धारा 17 का उल्लघंन, दी गई सजाएं



सीहोर। सरकारी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत धारा 17 का उल्लघंन बैखोफ जारी है। इस अधिनियम के तहत बच्चों को शारीरिक और मानसिक प्रताडऩा नहीं दी जा सकती लेकिन इछावर तहसील क्षेत्र के स्कूलों में पदस्थ शिक्षक इस धारा का उल्लघंन भी करने से बाज नहीं आ रहे हैं बीते एक पखवाड़े में दो अलग-अलग स्कूलों में होमवर्क को लेकर बच्चों से मारपीट की गई।
ताजे मामले में गुरूवार को ग्राम दीवडिय़ा के माध्यमिक कन्या स्कूल में कक्षा आठवी में पढऩे वाली छात्रा उषा को शिक्षिका गंजना मडलोई ने इतनी उठ्ठक बैठक लगवाई कि उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे गंभीर अवस्था में उसे अस्पताल रेफर करना पड़ा। छात्रा का कसूर इतना था कि उसने शिक्षिका द्वारा दिए गए होमवर्क पूर्ण नहीें किया था। इसी से नाराज होकर शिक्षिका ने सजा के तौर पर छात्रा से लगभग दौ सौ उठ्ठक बैठक लगवाई जिससे उसकी हालत खराब हो गई। बताया जाता है कि छात्रा के पेट में जोरदार दर्द उठा उसे तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया जहां डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। हालांकि इस मामले में छात्रा के परिजनों ने पुलिस को शिकायत नहीं की है लेकिन छात्रा के स्वस्थ्य होने के बाद मामले की शिकायत करेंगे।
दूसरा मामला जांच में
लगभग एक पखवाड़ा पहले इछावर तहसील क्षेत्र के ही गांव में एक शिक्षक ने एक छात्र को इतनी बुरा तरह पीटा कि उसे हाथ की अंगुलियां ही टूट गई इस मामले में छात्र के पिता ने इछावर थाने में शिकायत की थी लेकिन मामले में आवेदन लेकर जांच की जा रही है। पन्द्रह बीत जाने के बाद भी जांच ज्यों की त्यों है।
क्या है अधिनियम
स्कूलों में बच्चों को शारीरिक व मानसिक प्रताडऩा नहीं दिए जाने को लेकर सरकार तक सख्त है इसी के मद्दे नजर शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाया गया इस अधिनियम की धारा 17 में यह प्रावधान है कि स्कूल में पदस्थ शिक्षक किसी भी बच्चे को शारीरिक या मानसिक प्रताडऩा नहीं दे सकते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अवैध शराब जब्त
बुधनी। थाना पुलिस ने ग्राम पीलीकरार निवासी प्रमोद यादव आत्मज रामसेवक यादव एवं देवगांव के तहत संतराम आत्मज जयराम बारेला को अवैध रूप से मदिरा सहित रंगे हाथों गिरफ्तार कर आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की है।
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सटोरिया गिरफ्तार
सीहोर। थाना कोतवाली पुलिस ने कस्बा निवासी परवेज आत्मज अजीज को अवैध रूप से सट्टा लिखते पाए जाने पर रंगे हाथों गिरफ्तार कर इसके कब्जे से 240 रूपये नगदी व सट्टा पर्ची जब्त कर धूत अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।
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अज्ञात कारणों के चलते मौत
रेहटी। थाने के अंतर्गत एक अज्ञात पुरूष उम्र लगभग 30-35 साल ने अज्ञात कारणों के चलते ज्वाला माता मंदिर के ऊपर सलकनपुर पहाड़ पर पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
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बैलगाड़ी चालक घायल
आष्टा। कोठरी पुल पर गत दिवस शाम को आयसर क्रमांक एमपी 09 सीएफ 3339 के चालक ने अपने वाहन को अनियंत्रित गति से चलाते हुए बैलगाड़ी में टक्कर मार दी जिससे बैलगाड़ी पर सवार रमेश आत्मज बाबू घायल हो गया।
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ट्रक की टक्कर से बालक घायल
इछावर । थाना अतर्गत ट्रक क्रमांक एमपी 09 केसी-1835 के चालक छगनलाल आत्मज रघुवीर जाटव ने अपने वाहन को अनियंत्रित गति एवं लापरवाही पूर्वक चलते हुए आज सुबह कमलेशर के घर के सामने मेन रोड नादान के पास अनमोल उम्र ढाई वर्ष को टक्कर मारकर घायल कर दिया।

मौत से हार गई दीपाली

सीहोर। तीस दिन से मौत से संघर्ष कर रही दीपाली आखिरकार हार गई उसने आज जिला अस्पताल में अपनी अंतिम सांसे ली। दीपाली पर तीस अक्टूबर की शाम उसके प्रेमी शशांक कुशवाह ने घासलेट का तेल डालकर आग के हवाले कर दिया था तभी से उसका इलाज भोपाल और उसके बाद सीहोर चल रहा था।
गौरतलब है कि गुलजारी का बगीचा में रहने वाले प्रकाश कौशल की 18 वर्षीय पुत्री गत 30 अक्टूबर को अपने घर पर अकेली थी उसी समय शशांक कुशवाह नामक युवक आया और पीछे से घासलेट का तेल डालकर आग लगा दी। दीपाली चिल्लाई तो आसपड़ोस के लोगों ने आकर उसे गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल पहुंचा जहां से उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। इस मामले में प्राथमिक तौर पर पुलिस ने अज्ञात युवक के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला दर्ज किेया था लेकिन दीपाली और उसके परिजन के बयान के बाद शशांक कुशवाह को मामले में आरोपी बनाया गया और उसकी गिरफ्तारी भोपाल से की गई तभी से वह जेल में हैं। दीपाली की मौत के बाद पुलिस इस मामले तक आरोपी शशांक कुशवाह के खिलाफ लगाई गई धारा 307 को परिवर्तित कर 302 कि तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया।

किसी को नहीं मालूम कितनी कंपनियां आर्थिक लेनदेन में लगी? पुलिस और प्रशासन के पास नहीं है कंपनियों की सूची

आष्टा। आम आदमी के लखपति बनने की चाहत ने न केवल ऐसी कंपनियों को जन्म दिया जो रातोरात लखपति बनाने का दावा करती है, बल्कि अनेक बेरोजगारों को लुभावने अवसर बताते हुए उनके संपर्क और संबंधों से अपनी तिजौरी भर ली और मौका आने पर चलते बनें। ऐसी कई कंपनियां इस तहसील में आई और चली गई। कुछ के खिलाफ मामले दर्ज हुए तो कुछ की शिकायतें सिफारिश के आगे दबकर रह गई। आर्थिक अपराध की श्रेणी में आने वाली इन घटनाओं को लेकर जहां प्रशासन मौन है, वहीं पुलिस भी चुप्पी साधे हुए है। ऐसी स्थिति में ऐसी कंपनियां मौके का फायदा उठाकर विलोपित हो रही है। शहर के सर्वाधिक व्यस्त मार्ग कन्नौद रोड़ पर ऐसी कई कंपनियों के कार्यालय है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस के पास न तो इनकी जानकारियां है और ना ही सूचियां और फिर गांव की स्थिति तो और अधिक खतरनाक है। लखपति बनने और बनाने का दावा करने वाली एक कंपनी के लोगों की गिरफ्तारी से मामला फिर गरमा गया है। हजारों रूपए लेकर दो, पांच, दस और बीस रूपए के चेक भेजने वाली इस कंपनी को लेकर अब मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता जा रहा है। इस तहसील के अनेक गांवों में और तहसील मुख्यालयों पर इस तरह की कंपनियां कार्यरत है, जिनके संबंध में जनसामान्य की बात तो दूर खुद पुलिस और प्रशासन को भी जानकारी नही है। इसी के चलते लालच के वशीभूत होकर अनेक लोग लुभावने वादे और दावे के शिकार होकर अपनी जमा पूंजी गवां बैठे है। स्थानीय युवकों के माध्यम से तहसील से लेकर गांव तक अपनी पेठ जमाने वाली यह कंपनियां खतरा भापते ही रातोरात भाग खड़ी होती है। शेष बचते है तो सिर्फ स्थानीय युवक और लुटेपिटे लोग। कुल मिलाकर लालच के इस खेल में जहां नागरिक लखपति बनने के चक्कर में शामिल हो रहे है, तो होशियार लोग कंपनी बनाकर लालचियों को अपने जाल में फंसाकर खुद जरूर लखपति बन जाते है।

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