शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

बेटी बचाओ अभियान में धर्मगुरू निभाएंगे सकारात्मक भूमिका

सीहोर : बेटी बचाओ अभियान हेतु धर्मगुरू, आर्य समाज के प्रबंधक, गायत्री शक्तिपीठ के प्रबंधक और अन्य धर्म प्रचारकों को इस बात के लिए तैयार किया जाएगा कि वे प्रवचन के दौरान 10 से 15 मिनिट बेटी के महत्व की बातें करे। कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार केवल बेटियों के मातापिता का क्लब बनाया जाएगा तथा इन्हें राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर जिला स्तर पर सम्मानित कर अभियान का ब्रांड एम्बेस्डर बनाया जाएगा।कलेक्टर डॉ. गोयल ने शासन निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश स्तर पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने अभियान का रोड मैप तैयार कर लिया है। इसमें आधा दर्जन से ज्यादा विभाग साल भर 60 से ज्यादा गतिविधियां संचालित करेंगे। इसमें दहेज मांगने वाले परिवारों का सामाजिक बहिष्कार, सादगीपूर्ण विवाह समारोह को प्रोत्साहन तथा मंदिर और धर्मालयों में होने वाली आरती व प्रार्थना के अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को बेटी का महत्व समझाना प्रमुख है।कलेक्टर डॉ. गोयल ने बताया कि अभियान को सफल बनाने हेतु शासन के निर्देशानुसार समस्त राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत जो गतिविधियां तय की गई है उसमें ऐसे परिवार जिसमें सिर्फ बेटियां ही हैं, उन्हें अपने आवास की रजिस्ट्री पति-पत्नी के नाम करने पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी जाएगी। विकास खंड स्तर पर गांव की भजन मंडलियों के लिए विषय से संबंधित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। अभियान में अच्छा काम करने वाले व्यक्ति एवं संगठनों को पुरूस्कृत भी किया जाएगा।

द्वितीय विश्व युद्ध के भूतपूर्व सैनिकों एवं विधवाओं की पेंशन में 500 रूपये की वृद्धिसीहोर : 30 सितम्बर,11 शासन द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के भूतपूर्व सैनिकों तथा विधवाओं को जीवन यापन के लिए दी जा रही पेंशन में 500 रूपये की वृद्धि की गयी है। अब इन्हें 1500 रूपये प्रति माह के स्थान पर दो हजार रूपये प्रति माह पेंशन मिलेगी। यह लाभ भूतपूर्व सैनिकों तथा विधवाओं को सितम्बर माह से ही मिलेगा।

आज खुश तो बहुत होगे तुम.........

सीहोर। जब किसी की इच्छा पूरी होती है तो उसका खुश होना भी लजमी होता है पर 30 सितंबर का पुलिस विभाग के लिए कुछ ज्यादा ही खास था अखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका इंतजार था, सुबह से देर रात एक ही सवाल उन सबके जहन में था जो पिछले सालो में उस चौखट से कभी नाउम्मीद नहीं लौटे, इनका यह सवाल उनसे था जो कहीं न कहीं 30 सितंबर का इंतजार कर रहे थे। वाकई आज वे लोग बहुत खुश भी दिखाई दे रहे थे डरे सहमे रहने वाले चहेरे आज चहक रहे थे उनकी छाती का माप भी बढ़ हुआ है। दोपहर बाद जश्न का दौर भी शुरू हुआ इक दुसरे को बधाई भी दी गई। दरअसल 30 सितंबर को पुलिस महकमें का वो अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए जिनका नाम उन गिनती के अफसरो में शुमार है जिन्होने कभी विषम हालात में समझोता नहीं किया,ईमानदारी और देशभक्ति इनके रगों दोड़ती है वे है अदारणीय केडी पराशर , उनके सेवानिवृत्त वाले दिन मेहकमें में जाने क्या उत्साह दिखाई दिया,बात बीते सालों की जाए तो श्री पराशर ने महकमें को ऐसी नकेल मे ंकसा कि किसी की हिम्मत नहीं हुई की उनकी गाइड लाइन के बाहर जाकर काम करें जिन्होंने किया वो पवेलियन लौट गए पिछले कई सालों में महकमें में ऐसा खौफ देखने को नहीं मिला इस खौफ का असर आम आदमी को मिलने वाला न्याय के रूप में दिखाई दिया। उनके 30 सित्ांबर का दिन निशिचित तौर पर दुख देने वाला है। उन्ह ेअब चिंता सताने लगी है कि उनकी कौन सुनेगा? वस्तव में आज खुश तो बहुत होगे तुम एक फिल्म का यह डायलक इस मौके पर सटीक है।

अन्ना बनने की गलती मत करना ...... सब की खबर. कॉम से

पुण्य प्रसून वाजपेयी
ताजमहल ने अगर आगरा को पहचान दिलायी है तो जूतों ने आगरा के कलेक्टर को। आगरा के कलेक्टर का एक मतलब है स्टाम्प ड्यूटी का ऐसा खेल, जिसके शिकंजे में जूतों का जो उद्योगपति फंसा तो या तो उसका धंधा चौपट हुआ या फिर करोड़ों रुपये का हार कलेक्टर के गले में पड़ता है। करोड़ों का इसलिये क्योंकि आगरा के जूतों की पहचान समूचे यूरोप-अमेरिका में है। आगरा का कलेक्टर आगरा के जूते नहीं बल्कि आगरा के जूता मालिको के रुतबे को देखता है, और अपने मुताबिक नियमों का खेल कर सालाना पांच सौ करोड़ बनाना उसके लिए कोई बड़ी बात होती। सिर्फ फंसाने का अंदाज सरकारी होना चाहिये। इसमें नियम-कायदे सरकारी नहीं कलक्टर के चलें, और जांच से लेकर डराने-वसूलने तक जूता मालिक खुद के जूते पहनने तक झुके नहीं, तब तक खेल चलाना आना चाहिये।
जाहिर है इसमें जूता मालिक पर डीएम यानी जिलाअधिकारी का रौब और एसपी का खौफ रेंगना चाहिये। और कलेक्टर के इस खेल के नये शिकार हैं महाशय शाहरु मोहसिन। आगरा के बिचपुरी रोड पर मटगई गांव में जूता उघोग मै. यंगस्टाइल ओवरसीज के नाम से चलाते हैं। इनके जूते इटली, जर्मनी और फ्रांस में साल्ट एंड पीपर के नाम से बिकते हैं। विदेशी बाजार में धाक है। आगरा के जूतों को लेकर अंतर्र्राष्ट्रीय साख है तो कलेक्टर का खेल तो जम ही सकता है। बस, फांसने का खेल शुरु हुआ। शहरु मोहसिन जिस किराये के घर-जमीन पर इंडस्ट्री चलाते थे, उस जगह के मालिक ने बैंक से करोड़ों का लोन लिया था, चुकता नहीं किया तो कैनरा और ओवरसीज बैंक ने उस जगह को बेचने की निविदा अखबारों में निकाल दी। छह खरीदार पहुंचे। चूंकि शहरु मोहसिन उसी जमीन पर इंडस्ट्री चला रहे थे तो बैंक ने उन्हें प्राथमिकता दी और ढाई हजार वर्ग मीटर की इस जमीन की कीमत दो करोड़ दो लाख रुपए तय हुई। बैंक ने शहरु मोहसिन को नया मालिक बना दिया और अखबारों में विज्ञापन के जरिये जानकारी निकाल दी कि दो करोड़ दो लाख में मडगई ग्राम की गाटा संख्या १९१-१९२ बेच दी गयी।
बस कलेक्टर अजय चौहान की नजरें इस खरीद फरोख्त पर पड़ गई। सरकारी काम शुरु हुआ। जमीन को लेकर सरकारी दस्तावेजों के साथ नोटिस जूतों के मालिक के घर पहुंचा। इसमें लिखा गया कि सरकारी निरीक्षण में पाया गया कि जमीन लगभग चार हजार वर्ग मीटर की है। और जमीन निर्धारित बाजार रेट से बेहद कम पर खरीदी गई। लिहाजा जमीन की कीमत दो करोड़ दो लाख नहीं बल्कि ३९ करोड़ ९१ लाख ३१ हजार १८० रुपया होना चाहिये। और कम कीमत में जमीन खरीद कर सरकारी स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की गई है। ऐसे में दो करोड़ ६५ लाख २४ हजार ९४० रुपये स्टाम्प रुपये और अलग से दो लाख रु दंड के तौर पर चुकाये जाने चाहिये।
साफ है कि ऐसे में कोई भी उद्योगपति दो ही काम कर सकता है। एक तो जमीन की माप की सरकारी जांच कराने की दरख्वास्त कर जमीन की कीमत, जो कलक्टर ने ही पहले से तय कर रखी होगी, उसकी कॉपी निकलवाकर दिखाये। या फिर कलक्टर के आगे नतमस्तक होकर पूछे-आपको क्या चाहिये। तो शहरु मोहसिन ने पहला रास्ता चुना और यहीं से आगरा के बाबूओं के उस गुट को लगने लगा कि उनके ही जिले में कोई उनकी माफियागिरी को चुनौती दे रहा है। डीएम अजय चौहान के नोटिस में जमीन की कीमत १९ हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर बताया गया। जबकि डीएम के ही दस्तख्त से पहले जमीन की कीमत ३५०० रुपये वर्ग मीटर पहले से निर्धारित थी।
मामला यहां गड़बड़ाया तो झटके में कलेक्ट्रेट ऑफिस ने जमीन को व्यवसायिक करार दिया। लेकिन चूक यहां भी हो गई। क्योंकि यूपी सरकार के नियम तले व्यवसायिक जमीन की परिभाषा में उघोग आता नहीं है। लेकिन उसके बाद जमीन की माप को गलत बताया गया। लेकिन यहां भी बैंक के दस्तावेज ने बाबूओ की नींद उड़ा दी। फिर जमीन को मापने की बात कहकर जिस तरह सरकारी बाबू यानी तत्कालिन एडीएम अपर जिलाधिकारी उदईराम ने लगभग चार हजार वर्ग मीटर का जिक्र किया, उससे कलेक्टर का खेल और गड़बड़ाया। लेकिन कलेक्टर तो कलेक्टर है। उसने न आव देखा न ताव। तुरंत स्टाम्प ड्यूटी ना चुकाने पर जूता फैक्ट्री में ही ताला लगाने के आदेश दे दिये। शहरु मोहसिन ने तुरंत लखनऊ के दरवाजे पर दस्तक दी। लखनऊ तुरंत हरकत में आया। कमिश्नर को पत्र लिख कर पूछा कि यह स्टाम्प ड्यूटी का मामला क्या है। इस पर कमिश्नर ने अपर आयुक्त प्रमोद कुमार अग्रवाल को चिठ्टी लिखी। फिर प्रमोद अग्रवाल ने १९ जुलाई २०११ को आगरा के जिलाधिकारी अजय चौहान को चिठ्टी [पत्र संख्या ८४४] लिखकर १५ दिन के भीतर समूची जानकारी मांगी। लेकिन खेल तो पैसा वसूली का था और दांव पर आगरा के नौकरशाहों की दादागिरी लगी थी, जो आपस में चिठ्टी का खेल खेल रहे थे। तो नतीजा चिट्ठी को फाइल में ही दबा दिया गया। लेकिन लखनऊ से दुबारा ३० अगस्त को जब दुबारा पत्र आया कि जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आयी है, जिसे पन्द्रह दिनों में आना चाहिए था। अब हफ्ते भर में रिपोर्ट दें कि सच है क्या।
जाहिर है सच बताने के काम का मतलब सरकारी नियम-कायदो से लेकर बैंक द्वारा बेची गई फैक्ट्री की जमीन पर उठायी अंगुली को लेकर भी फंसना था। और स्टाम्प ड्यूटी की चिंता कर जूता फैक्ट्रियों के मालिक से अवैध वसूली के धंधे पर से भी पर्दा उठना था। ऐसे में जिलाधिकारी ने अपनी दादागिरी का आखिरी तुरुप का पत्ता फैक्ट्री के मालिक के खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश देकर फैक्ट्री पर ताला लगवाकर फेंका। आनन फानन में एसडीएम ने नोटिस निकाला और २२ सितंबर को नेशनल बैंक में फैक्ट्री के बैंक अकाउंट को सीज कर लिया। चूंकि ज्यादातर ट्रांजेक्शन यूरोपीय देशों में होते हैं तो झटके में सबकुछ रुक गया। इस दौर में फैक्ट्री के मालिक शहरु मोहसिन इटली में आगरा के जूतों की मार्केटिंग में व्यस्त थे तो खबर मिलते ही उल्टे पांव दौड़े। दो दिन में दिल्ली पहुंचे। तो आगरा से पत्नी ने फोन कर बताया कि फैक्ट्री का अकाउंट भी सील कर दिया गया है। और पुलिस घर और फैक्ट्री के बाहर डीएम के आदेश का डंडा गाढ़ कर बैठी है कि शहरु मोहसिन आगरा में पहुंचे तो उन्हें गिरफ्तार कर ले। अब शहरु मोहसिन दिल्ली में बैठे हैं। हर दस्तावेज दिखाने और समूची कहानी कहने के बाद इतना ही कहते हैं- "मैंने सिर्फ इतनी ही गलती की कि उनको पैसा नहीं दिया। यह उसी की सजा है। ५० लाख की मांग अधिकारी सौदेबाजी में अपने कमीशन के तौर पर कर रहे थे। लेकिन मैंने गलत क्या किया। अन्ना के बारह दिन के उपवास के बाद भरोसा हमारा भी जागा था। लेकिन यह तो अत्याचार है। आगरा में घुस नहीं सकता। बीबी, बच्चो से मिल नहीं सकता। बूढ़े अब्बा आगरा से बार बार फोन पर कहते हैं डीएम- कलेक्टर तो खुदा से बढ़कर हैं। अम्मी कहती हैं खुदा पर भरोसा रखूं। अब लखनऊ जा रहा हूं । देखूं वहा सेक्रेटिएट की पांचवीं मंजिल से न्याय मिलता है या नहीं। वहां से आगरा जाने का रास्ता बनता है या नहीं?"

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

लोक सेवा गारंटी में 7 विभागों की 26 सेवाएं और जुड़ी

सीहोर : मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम,2010 नागरिक अधिकारों को स:शक्त बनाने का अभिनव प्रयास है। यह कानून मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वाराप्रदेश में किए जा रहे सुशासन के प्रयासों में महत्वपूर्ण कड़ी है। यह कानून बनाकर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आमजन के याचना भाव को शक्ति में बदल दिया है। चिन्हित सेवाएं प्राप्त करना आमजन का अधिकार है। निश्चित समय में लोक सेवा प्रदान करने में कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर अर्थ दण्ड का प्रावधान भी इस अधिनियम में है। राज्य शासन ने 24 सितम्बर,11 को अधिसूचना जारी कर 7 अन्य विभागों की 26 सेवाओं को इस अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित किया है तथा पूर्व के विभागों में सेवाओं का विस्तार भी किया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में इस अधिनियम के अंतर्गत 9 विभागों की 26 सेवाएं शामिल है। अब प्रदेश के लोगों को 16 विभागों की 52 लोक सेवाएं प्राप्त हो सकेंगी। 24 सितम्बर,11 को सम्मिलित 7 अन्य विभाग क्रमश: वन, गृह, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, महिला एवं बाल विकास, परिवहन एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग है। ताज़ा अधिसूचना के तहत सेवाओं का ब्यौराक्र. विभाग का नाम सेवाएँ1. ऊर्जा विभाग स्थायी विच्छेदन करने संबंधी आवेदन का निराकरण2. श्रम विभाग (मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल) 1. निर्माण श्रमिकों का पंजीयन2. निर्माण कार्य के दौरान दुर्घटना में स्थायी अपंगता होने पर सहायता प्रदान करना।3. राजस्व विभाग 1. नजूल अनापत्ति प्रमाण-पत्र2. शोध्य क्षमता प्रमाण-पत्र3. वन्यप्राणियों द्वारा फसल हानि करने पर किसान को भुगतान4. नगरीय प्रशासन विभाग बी.पी.एल. सर्वे सूची में नाम जोड़ना5. सामान्य प्रशासन विभाग आय प्रमाण-पत्र6. वन विभाग 1. वन्यप्राणियों से जनहानि हेतु राहत राशि का भुगतान2. वन्य-प्राणियों से जन घायल हेतु राहत राशि का भुगतान3. वन्य-प्राणियों से पशु हानि राहत राशि का भुगतान4. मालिक मकबूजा प्रकरण में भुगतान4.1 डिपो में काष्ठ प्राप्त होने के उपरांत भुगतान 4.2 पृथक लाट के विकल्प की दशा में विक्रय मूल्य की पूर्ण वसूली के प्रकरण5. काष्ठ के परिवहन के लिये अनुज्ञा-पत्र प्रदाय करना7. गृह विभाग 1. मृतक के परिवार के सदस्य के आवेदन पर पी.एम. रिपोर्ट की प्रति का प्रदाय किया जाना2. दर्ज एफ.आई.आर. की प्रतिलिपि शिकायतकत्र्ता को प्रदान करना3. लायसेंस अवधि समाप्त होने के पूर्व अवर्जित बोर के शस्त्र लायसेंस का नवीनीकरण4. लायसेंस अवधि की समय-सीमा के पश्चात एन.पी. बोर के शस्त्र लायसेंस का नवीनीकरण8. लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग 1. राज्य बीमारी सहायता निधि के अधीन रुपये 1 लाख के प्रकरण (जिला-स्तरीय) का स्वीकृत किया जाना2. विकलांगता प्रमाण-पत्र दिया जाना3. दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना कार्ड जारी करना9. किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग 1. रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, बीज विक्रय लायसेंस जारी करना2. रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, बीज विक्रय लायसेंस का नवीनीकरण10. महिला एवं बाल विकास विभाग लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत स्वीकृति जारी करना11. परिवहन विभाग 1. लर्निंग ड्रायविंग लायसेंस2. वाहन फिटनेस प्रमाण-पत्र12. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ग्रामीण क्षेत्र में बी.पी.एल. के नाम जोड़ना

बेटी वाले दम्पत्तियों का सम्मान करेगा महिला-बाल विकास विभाग

सीहोर : मध्यप्रदेश में पाँच अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे ""बेटी बचाओ अभियान"" को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग सक्रियता से जुट गया है। अभियान के लिये नोडल विभाग घोषित हो चुके महिला एवं बाल विकास विभाग को जिन गतिविधियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनसे बेटियों वाले परिवार स्वयं को गौरवान्वित महसूस करेंगे। सीहोर जिले में "बेटी बचाओ अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। इस सिलसिले में कलेक्टर डॉ. संजय गोयल द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग कम शिशु लिंग अनुपात वाले जिलों में कार्यक्रम आयोजित कर तथा उनमें सिर्फ बेटियों वाले दम्पत्तियों को सम्मानित करायेगा। विभाग विभिन्न समुदायों के साथ संवाद कर उनके द्वारा समाज में किये जाने वाले प्रयासों की रणनीति भी तैयार करेगा। इसके साथ ही हर साल विभाग एक नियत तिथि को ""बेटी दिवस"" का आयोजन भी करेगा, जो किसी प्रसिद्ध महिला के जन्म-दिवस पर होगा। जिले में बेटी बचाओ अभियान का नेतृत्व जिले की महिला जन-प्रतिनिधियों/समाज सेविकाओं को सौंपा जायेगा।अभियान में विशिष्ट योगदान प्रदान करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को भी हर वर्ष पुरस्कृत किया जायेगा। बेटियों को गोद लेने वाले अभिभावकों और उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाली बेटियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने की भी पहल की जायेगी। ""सिर्फ बेटी वाले परिवार क्लब"" के सदस्यों को अभियान से सक्रिय रूप से जोड़कर गतिविधियाँ आयोजित की जायेंगी। दहेज माँगने वाले एवं देने वाले परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने के लिये जन-जागृति लायी जायेगी तथा सादगीपूर्ण विवाह समारोह को बढ़ावा दिया जायेगा।अभियान को सफल बनाने तथा बेटियों की महत्ता को कायम रखने की दिशा में घरेलू हिंसा अधिनियम का भी प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। अभियान के लिये कार्यशालाओं के आयोजन के साथ ही समाज में बेटियों के पक्ष में वातावरण निर्माण के लिये महिला एवं बाल विकास विभाग अन्य प्रभावी गतिविधियाँ भी संचालित करेगा ।

बुधवार, 28 सितंबर 2011

तीन को किया जिला बदर

सीहोर। जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. संजय गोयल ने तीन आदतन अपराधियों को छह माह के लिए जिला बदर करने के आदेश दिए हैं।
कलेक्टर ने पुलिस अधीक्षक से प्राप्त प्रतिवेदन से पूर्णत: संतुष्ट होकर प्यारे मियां पिता फजल मियां उम्र 26 वर्ष निवासी जमशेद नगर कस्बा, राधेश्याम पिता नरबत सिंह मोगिया उम्र 38 वर्ष निवासी ग्राम मोगियापुरा थाना जावर और रामचन्द्र उर्फ पप्पू पिता देवकरण माली उम्र 35 वर्ष निवासी जावर को जिला बदर किया

जिला अदालत से कैदी फरार

सीहोर। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा एक कैदी सीहोर जिला अदालत में प्रहरियों को चकमा देकर भाग खड़ा हुआ। मामले में कोतवाली पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दोराहा थाना क्षेत्र के ग्राम सिराड़ी निवासी रघुवीर दांगी को हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा न्यायालय द्वारा सुनाई गई थी। सजा के बाद रघुवीर को भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। एक अन्य मामले में पेशी के दौरान रघुवीर को भोपाल जेल के दो प्रहरी सीहोर लेकर आए थे। पेशी के बाद रघुवीर को जब सेंट्रल जेल के प्रहरी वापस भोपाल ले जा रहे थे, तभी वह प्रहरियों को चकमा देकर भागने में सफल हो गया। जानकारी के अनुसार प्रहरियों ने उसे पकड़ने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।
कई मामले हैं दर्ज
सिराड़ी निवासी रघुवीर दांगी के खिलाफ दोराहा थाना में मारपीट, बलवे और हत्या जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं। अदालत से फरार होने के बाद सीहोर पुलिस रघुवीर के खिलाफ एक और प्रकरण दर्ज किया। इसके अलावा सेंट्रल जेल के प्रहरियों द्वारा लापरवाही बरतने को लेकर भी कार्रवाई की जाना तय मानी जा रही है।
गौरतलब है कि करीब तीन माह पहले जिला चिकित्सालय से एक बंदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। जेल प्रहरियों को चकमा देकर फरार हुए हत्या के आरोपी लाड़सिंह का अभी तक सीहोर पुलिस सुराग नहीं लगा पाई है।

यातायात में बाधक अतिक्रमण हटाएं : कलेक्टर

यातायात में बाधक अतिक्रमण हटाएं : कलेक्टर
सीहोर। सड़कों पर आवारा पशु पाए जाने पर अब पशुपालकों की खैर नहीं है। कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने अधिकारियों को तीन दिन की मोहलत देते हुए आवारा पशुओं के खिलाफ सख्ती से पेश आने के निर्देश दिए हैं। इसी तरह यातायात में बाधक स्थानों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने, सड़कों के गड्डों की तत्काल मरम्मत कराने, अवैध रूप से घरेलु गैस से संचालित वाहनों के खिलाफ कार्यवाही करने और यात्री बसों में ओव्हर लोडिंग एवं प्रति स्पर्धा के चलते संभावित घटनाओं को रोकने के लिए अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने यह निर्देश सोमवार को आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में अधिकारियों को दिए। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री के.डी.पाराशर, संयुक्त कलेक्टर श्री सुभाष द्विवेदी, आरटीओ श्री राज नारायण, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण श्री हनफी, जिला शिक्षा अधिकारी श्री धर्मेन्द्र शर्मा, एसडीएम श्री इच्छित गढ़पाले सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
आवारा पशु दिखे तो खैर नहीं
कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने बैठक में अधिकारियों से साफ तौर पर कहा कि मुझे सड़कों पर आवारा पशु दिखना नहीं चाहिए। उन्होंने आवारा पशुओं के खिलाफ तीन दिवस में सख्ती से कार्यवाही करने की ताकीद करते हुए अधिकारियों को अभियान चलाने और संबंधित पशु पालकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाइवे तथा अन्य सड़क मार्गों पर पशुओं के बैठने से जहां मार्ग अवरूद्ध होता है वहीं यह स्थिति दुर्घटना का कारण भी बनती है जिसे सख्ती से रोका जाना जरूरी है।
तो पशुओं को सही जगह भेजा जाएगा
कांजी हाउस और गौ शाला में भेजे जाने के बावजूद पशु पालकों और गौ शाला संचालकों द्वारा बरती जाने वाली लापरवाही का अधिकारियों द्वारा हवाला दिए जाने पर कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने कहा कि ऐसे पशुओं को उन अन्त्योदय परिवारों को सौंप दिया जाए जिनके बच्चे कुपोषित हैं। उन्होंने एसडीएम श्री इच्छित गढ़पाले को गौ शालाओं का निरीक्षण करने के निर्देश दिए और कहा कि गौ शालाओं के नियम विरूद्ध संचालन पाए जाने पर संबंधित गौ शाला के अनुदान रोकने की कार्यवाही की जाए।
वाहन चैकिंग अभियान चलाएं
बसों में ओव्हर लोडिंग एवं प्रति स्पर्धा के कारण संभावित दुर्घटनाओं को रोकने संबंधी चर्चा के दौरान कलेक्टर ने पुलिस एवं परिवहन विभाग के संयुक्त चैंकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला परिवहन अधिकारी से कहा कि वे स्कूली बच्चों को लाने ले जाने वाले वाहनों के परमिट, फिटनेस आदि की जांच करें और एलपीजी गैस से संचालित वाहनों के खिलाफ खाद्य अमले के सहयोग से सख्त कार्यवाही करें। स्कूली वाहनों में भी ओव्हर लोडिंग नहीं हो, आॅटो रिक्शा में सुरक्षा जाली अनिवार्यतº लगी हो, वाहन चालक वर्दी में रहें इसकी जांच की जाए। बगैर रजिस्ट्रेशन चलने वाले वाहनों के खिलाफ सख्ती से कार्यवाही की जाए। वाहनों में लाइट और रिफ्लेक्टर हो यह सुनिश्चित किया जाए।
महिलाओं से अभद्रता बर्दाश्त नहीं
यात्री बसों में महिलाओं और छात्राओं के साथ अभद्रता करने वाले अब बच नहीं पाएंगे। उनके खिलाफ सख्ती से पेश आने के निर्देश कलेक्टर ने दिए हैं। बैठक में कलेक्टर डॉ. गोयल ने कहा कि महिलाओं एवं छात्राओं के लिए यात्री बसों में सीट आरक्षित कर उनकी सुविधा का ध्यान रखा जाए और उनके साथ किसी तरह की अभद्रता और दुर्व्यवहार नही हो यह सुनिश्चित करने के लिए सभी बस संचालकों को सूचित कर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं और छात्राओं से किए गए दुर्व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसा करने वाले को जेल भेजा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे यात्री बसों पर निगाह रखें, छात्राओं और महिलाओं से जरूरी पूछताछ करें। बस कन्डेक्टर ड्रेस में रहें जिस पर उसकी नेम प्लेट लगी हो यह सुनिश्चित किया जाए। पुलिस अधीक्षक श्री के.डी.पाराशर ने बताया कि किसी भी महिला या छात्रा द्वारा दुर्व्यवहार की शिकायत पुलिस कंट्रोल रूप के दूरभाष क्रमांक 227004 अथवा 100 नंबर पर की जा सकती है और पुलिस को शिकायत मिलने पर तत्काल कार्यवाही की जाएगी।
विद्यार्थियों के लिए शिविर लगाएं
बैठक में स्कूली बच्चों को वाहन चलाने का लायसेन्स जारी करने के लिए कलेक्टर ने आरटीओ को शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने डीईओ से कहा कि वे स्कूली बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण दिलाने की कार्यवाही करें।
अब बस स्टेन्ड आएंगी सभी बसें
कलेक्टर डॉ. गोयल ने सीहोर बस स्टेन्ड पर नहीं आने वाली बसों की सूची तैयार करने के निर्देश आरटीओ को दिए हैं। उन्होने कहा कि ऐसी बसें जिनका सीहोर स्टापेज है और वे सीधे बायपास से निकल जाती हैं उन बस आॅपरेटरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। कलेक्टर द्वारा यह निर्देश सीहोर वासियों की आवागमन सुविधा का ध्यान रखते हुए दिए गए हैं।
यह भी निर्देश
बैठक में खतरनाक पुल, पुलिया, रपटा एवं दुर्घटना संभावित स्थानों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने और सावधानी सूचक बोर्ड लगाने, दूकानों के सामने वाहनों की पार्किंग के लिए लाइन डालने, स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल आने व जाने वाले वाहनों पर निगरानी के लिए टीचर की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

ये कैसा.....

ये है कोलार डेम


इस साल कोलार डैम मे भर पुर पानी जमा हो गया है

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

पुलिस और कंजरों के बीच हवाई फायरिंग

सीहोर जिले की लाड़कुई चौकी क्षेत्र में बीती रात चार बजे ट्रैक्टर चुराकर भाग रहे कंजरों और पुलिस के बीच फायरिंग हुई। कंजर अंधेरे का लाभ उठाकर जंगल की ओर भाग निकले पुलिस सुबह तक जंगल की सर्चिंग करती रही, लेकिन उसके हाथ खाली रहे।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बीती रात चार बजे के लगभग कोसमी और संकोटा घाट के समीप पुलिसकर्मियों और कंजरों के बीच उस समय हवाई फायरिंग हुई, जब कंजर एक ट्रैक्टर चुराकर भाग रहे थे और पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। बताया जाता है कि कंजरों की संख्या तीन थी। एक ट्रैक्टर चला रहा था, जबकि दो मोटर साइकिल पर सवार थे। इन तीनों ने एक ट्रैक्टर चोरी करने के बाद लाड़कुई में दूसरा ट्रैक्टर चोरी करने का प्रयास किया, तभी व्यक्ति के जागने पर यह वहां से भाग निकले। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस आती, तब तक यह तीनों कौसमी के जंगलों की तरफ निकल गए। पुलिस ने इन्हें वहां पहुंचकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन इन्होंने फायरिंग शुरु कर दी, दूसरी ओर पुलिस ने भी फायरिंग की, लेकिन अंधेरे का लाभ लेते हुए यह तीनों कंजर घने जंगल में भाग निकले। दूसरे दिन शाम तक पुलिस इनकी तलाश नहीं कर सकी थी।

राजनीति की सीढ़ी पर नियमों का रोड़ा


सीहोर। राजनीति की पाठशाला में छात्र राजनीति में कक्षा पहली का दर्जा माना गया है और कक्षा पहली में प्रवेश लेने के इच्छुक कई विद्यार्थियों का मन इस बार के छात्र संघ चुनाव में मसोस गया। चूंकि निर्धारित नियमों के अनुसार अनेक ऐसे छात्र, जिन्होंने इस मर्तबा के छात्र संघ चुनाव से अपनी राजनीति सफर शुरु करने की उम्मीद लगा रखी थी, उनके लिए नियम रोड़ा बन गए और इस बार के चुनावों में जिलेभर में जो परिदृश्य सामने आया, उसमें कहीं भी यह नहीं दिखाई दिया कि जीतने को लेकर जद्दोजहद हो या फिर राजनीति।
शुक्रवार को कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव हुए, इन चुनावों में न केवल शासकीय कॉलेज बल्कि निजी कॉलेजों में भी छात्र राजनीति को लेकर वो गर्माहट मजसूस नहीं की गई, जिसकी उम्मीद छात्र नेताओं ने प्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले चुनावों के लिए की थी। मायूस वे नेता भी हुए, जिन्हें कहीं न कहीं इस बात की उम्मीद थी कि प्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले छात्र संघ चुनाव के उपरांत कुछ ऐसे छात्र नेता राजनीति में आएंगे, जिनके कंधे पर आगामी समय में राजनीति का वजन रखा जा सके, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और प्रत्यक्ष प्रणाली से हुए इन चुनावों में राजनीति की सीढ़ी पर ऐसा रोड़ा अटकाया कि अच्छे-अच्छे से मैदान से बाहर हो गए। नियमों के अड़ंगे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इछावर के कॉलेज में चुनाव निर्विरोध होने की स्थिति में निरस्त कर दिए गए। वहीं सीहोर में कई पदाधिकारी निर्विरोध हुए। इसी तरह नसरुल्लागंज, रेहटी, आष्टा की बात की जाए तो यहां भी पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। निर्विरोध निर्वाचित होना इस बात का संकेत होता है कि संबंधित पदाधिकारी में दम हैं, लेकिन यहां यह बात सही नहीं है। चूंकि छात्र संघ चुनाव में अनेक उम्मीदवार इसलिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए चूंकि उस वर्ग में कोई दूसरा उम्मीदवार पात्र ही नहीं था।
राजनीतिक दलों में निराशा
छात्र संघ चुनाव में अच्छे नेतृत्व करने वाले नेताओं का मिलना लगभग तय रहता है। यह ऐसे चुनाव हैं, जिसमें इस बात पर मुहर लग जाती है कि चुना गया नेता आगामी दिनों में राजनीति में चमकेगा जरुर। राजनीतिक दलों ने इस बार भी कुछ ऐसी ही उम्मीद लगाई, चूंकि लंबे अंतराल पर प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्र संघ चुनाव हुए, परंतु राजनीति दलों को निराशा हाथ लगी। प्रत्यक्ष प्रणाली में ऐसे नियमों को बनाया गया कि चुनाव नीरस हो गए और अनेक उम्मीदवारों को चुनाव से अपने आप को अलग करना पड़ा।
चुनाव निरस्त कराने की मांग
अभाविप कार्यकर्ताओं ने सीहोर पीजी कॉलेज के चुनाव निरस्त कराने की मांग करते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि कॉलेज प्राचार्य जीडी सिंह ने उनके कार्यकर्ता राहुल राठौर और श्वेता शर्मा के आवेदन निरस्त कर दिए, जिससे अभाविप छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव ऐन टाईम पर नहीं लड़ सका। छात्रों का कहना है कि पहले नामांकन की जांच के बाद दोनों को कक्षा प्रतिनिधि निर्वाचित घोषित किया गया था। इसके बाद उन्हें अयोग्य घोषित करना सोची समझी रणनीति के तहत दुराभावपूर्वक किया गया है। कार्यकर्ताओं ने चुनाव निरस्त करने की मांग
छात्र संघ चुनाव परिणाम
शासकीय चंद्रशेखर आजाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय : अध्यक्ष कविता जायसवाल, उपाध्यक्ष प्राची शर्मा, सचिव ओमप्रकाश राजपूत, सहसचिव निखलेश सोनी, यूआर निरंक।
शासकीय कन्या महाविद्यालय सीहोर : अध्यक्ष निरंक, उपाध्यक्ष मनीषा गौर, सचिव पूजा पाटीदार, सहसचिव रुपाली राठौर, यूआर निरंक।
डिग्री कॉलेज इछावर : चुनाव नहीं हो सके।
डिग्री कॉलेज आष्टा : अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर, उपाध्यक्ष पूजा मेवाड़ा, सचिव अर्जुन सिंह जलवाया, सहसचिव पारुल ताम्रकार, यूआर वंदना वर्मा।
डिग्री कॉलेज नसरूल्लागंज : अध्यक्ष जितेंद्र पंवार, उपाध्यक्ष शुभम पंवार, सचिव राजकुमारी, सहसचिव अनिल यदुवंशी, युआर जितेंद्र बकोरिया।
डिग्री कॉलेज रेहटी : अध्यक्ष कपिल चौहान, उपाध्यक्ष हरीश महेश्वरी, सचिव शिवानी बलभद्र, सह सचिव विशाखा सिसोदिया, युआर मंगल सिंह चंद्रवंशी।
डिग्री कालेज बुधनी : अध्यक्ष जगदीश उईके, उपाध्यक्ष ममता यादव, सचिव सरवदी अहिरवार, सह सचिव हेमलता मीणा और युआर राकेश मालवीय को निर्वाचित घोषित किया गया है।
राय भंवरसिंह कॉलेज नसरुल्लागंज : यहां 17 कक्षा प्रतिनिधि चुने जाने थे, लेकिन एक भी नामांकन जमा नहीं हुआ।

सोमवार, 19 सितंबर 2011

नसरुल्लागंज में नहीं मिल रहे स्टांप

सीहोर। जिले की नसरुल्लागंज तहसील सहित अन्य तहसील मुख्यालयों पर स्टांप पेपरों का टोटा बना हुआ है। लोग स्टांप पेपरों के लिए परेशान हो रहे हैं। सोमवार को नसरुल्लागंज से आए संजय मालवीय ने बताया कि तहसील मुख्यालय पर स्टांप पेपर नहीं मिल रहे हैं। वे पिछले तीन दिनों से परेशान हो रहे थे। आज सीहोर में कई स्टांप वेंडरों के पास चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें सौ रुपए का स्टांप अधिक कीमत देकर खरीदना पड़ा। दूसरी होर जिला प्रशासन ने जिला कोषालय अधिकारी से स्टांप के लिए संपर्क करने के लिए कहा है।

ट्रेन स्टापेज की मांग को लेकर ट्रेन के आगे लेट गए लोग



सीहोर। ट्रेनों के स्टापेज के लिए रेलवे द्वारा दिए गए छह महीने के आश्वासन की समय-सीमा समाप्त होने पर प्रदर्शनकारियों ने फिर एक बार आंदोलन शुरू किया है। प्रदर्शन के तीसरे दिन सोमवार को आंदोलनकारियों ने रेल के आगे पटरी पर लेटकर अपना विरोध प्रदर्शन किया।रतलाम रेल मंडल के डीआरएम ने नगर के लोगों की उम्मीदोें पर पानी फेर दिया। जिला मुख्यालय पर ट्रेनों के स्टापेज की मांग कर रहे आंदोलनकारियों और लोगों की स्टापेज की मांग को उन्होंने सिरे से खारिफ करते हुए ट्रेन स्टापेज करवाना अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। डीआरएम की इन बातों से आंदोलनकारी भड़क गए। इस दौरान लोगों ने जहां डीआरएम की स्पेशल ट्रेन के सामने बैठकर प्रदर्शन किया तो डीआरएम और रेल प्रशासन के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। दोपहर 12 बजे से प्रांरभ हुआ प्रदर्शनो का सिलसिला शाम चार बजे खत्म हो सका। इस दौरान उग्र भीड़ को काबू करने में रेलवे पुलिस के साथ मंडी पुलिस को भी भारी मशक्कत करना पड़ी।ट्रेन रोकने का किया प्रयास- डीआरएम की ट्रेन के गुजर जाने के बाद आंदोलनकारियों व भीड़ का आक्रोश कम होने की बजाए बढ़ गया। इस दौरान जहां प्रमुख आंदोलनकारी नौशाद खान ने मंगलवार से अपने आमरण अनशन की घोषणा कर दी। वहीं तीन बजे के आसपास आई पैंसेजर गांडीÞ को रोकने का प्रयास भी आक्रोशित भीड़ ने किया। इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस बल ने भीड़ सहित अन्य आंदोलनकारियों को समझाकर स्टेशन सीमा से बाहर कर दिया। आमरण अनशन की तैयारी- प्रमुख आंदोलनकारी नौशाद खान ने बताया कि पिछली बार दिया गया आश्वासन झूठा साबित हुआ है, अब हम रेल रूकने तक अपना आंदोलन नहीं रोकेंगे। उन्होंने बताया कि आने वाले एक-दो दिन में हम नगर बंद का आह्वान करने जा रहे हैं। साथ ही नगर के सभी व्यवसायिक संगठनों, व्यापारी संगठनों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से सहयोग की अपील करेंगे। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय होने के बाद भी यहां रेलवे की सुविधाएं तहसील के रेलवे स्टेशनों से भी बदतर हैं, कई ट्रेनें जो आगे की तहसीलों पर रूकती हैं यहां से बिना रूके गुजर जाती हैं। ट्रेन स्टापेज के लिए पिछले कई सालों से शहर के अनेक संगठनों द्वारा जनप्रतिनिधियों और रेलवे के अधिकारियों को मांग पत्र सौंपे गए हैं।

बिजली चोरी के आरोप में एक साल की सजा

सीहोर, विशेष न्यायालय फास्ट ट्रेक कोर्ट आष्टा पीठासीन अधिकारी आरके गुप्त द्वारा बिजली चोरी के आरोपी शिवचरण पिता अमरसिंह निवासी ग्राम दोनिया बापचा को एक वर्ष के सश्रम कारावास व दस हजार रुपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार 18 जुलाई 2005 को विद्युत मण्डल आष्टा के निरीक्षण दल एनएस यादव कनिष्ठ यंत्री, हनुमंत सिंह लाईन हेल्पर एवं दामोदरदास लाईन हेल्पर द्वारा ग्राम दोनिया में विद्युत चैकिंग के दौरान शिवचरण को उसके घर पर सीधे एलटी लाईन से तार डालकर अपने घर से 3 एचपी की आटा चक्की को चलाते हुए पकड़ा था। मौके पर निरीक्षण दल द्वारा पंचनामा व अन्य दस्तावेज तैयार किए थे। चैकिंग दल द्वारा 6300 रुपए की विद्युत चोरी का प्रकरण बनाया गया था। उक्त प्रकरण परिवादी नोडल अधिकारी टीआर बांके द्वारा विशेष न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था। उक्त प्रकरण में विद्युत मंडल द्वारा लोक अदालत के माध्यम से आरोपी से 6300 रुपए क्षतिपूर्ति राशि जमा कर राजीनामे हेतु भी प्रस्ताव रखा गया था। किन्तु आरोपी द्वारा प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। आरोपी को धारा 135 विद्युत अधिनियम के अपराध के लिए एक वर्ष का सश्रम कारावास तथा दस हजार रुपए का अर्थदंड किया है।

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