सीहोर। जब किसी की इच्छा पूरी होती है तो उसका खुश होना भी लजमी होता है पर 30 सितंबर का पुलिस विभाग के लिए कुछ ज्यादा ही खास था अखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका इंतजार था, सुबह से देर रात एक ही सवाल उन सबके जहन में था जो पिछले सालो में उस चौखट से कभी नाउम्मीद नहीं लौटे, इनका यह सवाल उनसे था जो कहीं न कहीं 30 सितंबर का इंतजार कर रहे थे। वाकई आज वे लोग बहुत खुश भी दिखाई दे रहे थे डरे सहमे रहने वाले चहेरे आज चहक रहे थे उनकी छाती का माप भी बढ़ हुआ है। दोपहर बाद जश्न का दौर भी शुरू हुआ इक दुसरे को बधाई भी दी गई। दरअसल 30 सितंबर को पुलिस महकमें का वो अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए जिनका नाम उन गिनती के अफसरो में शुमार है जिन्होने कभी विषम हालात में समझोता नहीं किया,ईमानदारी और देशभक्ति इनके रगों दोड़ती है वे है अदारणीय केडी पराशर , उनके सेवानिवृत्त वाले दिन मेहकमें में जाने क्या उत्साह दिखाई दिया,बात बीते सालों की जाए तो श्री पराशर ने महकमें को ऐसी नकेल मे ंकसा कि किसी की हिम्मत नहीं हुई की उनकी गाइड लाइन के बाहर जाकर काम करें जिन्होंने किया वो पवेलियन लौट गए पिछले कई सालों में महकमें में ऐसा खौफ देखने को नहीं मिला इस खौफ का असर आम आदमी को मिलने वाला न्याय के रूप में दिखाई दिया। उनके 30 सित्ांबर का दिन निशिचित तौर पर दुख देने वाला है। उन्ह ेअब चिंता सताने लगी है कि उनकी कौन सुनेगा? वस्तव में आज खुश तो बहुत होगे तुम एक फिल्म का यह डायलक इस मौके पर सटीक है।







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