सोमवार, 22 अप्रैल 2013

शिव और पार्वती आस्था और विश्वास के प्रतीक-पंडित श्री पाठक



सीहोर। शिव और पार्वती आस्था और विश्वास के प्रतीक है। शिव व शक्ति एक-दूसरे के परीक्षक है वो कहीं भी अलग नहीं है। मां पार्वती का वाहन सिंह तथा शिव का वाहन बैल, शिव के गले में नृत्य करते सर्प, भगवान कार्तिकेय जी का वाहन मोर, श्री गणेश भगवान का वाहन मूषक है। एक-दूसरे के जन्मजात बैरी होते हुए भी परिवार की एकता के लिए शातभाव से एक स्थान पर विराजमान है। एकता, विश्वास और आस्था का सबसे बड़ा कोई नही हो सकता। उक्त उद्गार स्वामी नारायण मंदिर में जारी संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन युवा संत पंडित मोहित पाठक ने कहे।
शिव पार्वती विवाह प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए श्री पाठक ने कहा कि जिस परिवार में विश्वास एवं आपसी तालमेल है, वह परिवार सुखी है। सती चरित्र का सरस एवं मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि दक्ष की बेटी सती यज्ञ कुण्ड में प्राणों का त्याग कर देती है। उन्होंने कहा कि दक्ष वो जिसने हर क्षेत्र में निपूणता प्राप्त की हो, अगर समाज का दक्ष व्यक्ति ही गलती करता है तो उसके कारण पूरे समाज में अराजकता, अशांति, अनाचार, अत्याचार, घमंड, पाखण्ड बढऩे की स भावना बढ़ जाती है, तब शिव यानि कल्याण उसको सजा देते हैं। दक्ष बुद्धिमान था इस कारण ब्रह्मा जी ने उसे देवताओं का अधिपति बना दिया है। हमारे भाव हमारे पतन के कारण होते है। हर आदमी में कुछ भाव स्थायी होते हैं। सफलता पर खुशी, असफलता पर विषाद और कभी-कभी मन में ईष्र्या का भाव। अक्सर हम अपनी सफलता की राह पर खुद अपने मनोभावों के कारण ही रुकावटें खड़ी कर लेते हैं। होना यह चाहिए कि जब हम सफलता के मार्ग पर चल रहे हों तो अति उत्साह, विषाद और ईष्र्या तीनों ही तरह के भावों को छोड़कर आगे बढ़ें। तभी जीवन का सच्चा आनंद और सफलता का सुख भोग सकेंगे।
श्रीराम जन्मोत्सव आज
कथा के दूसरे दिन बड़ी सं या में श्रद्धालुओं ने श्रीराम कथा का श्रवण किया। मंगलवार को कथा के तीसरे दिवस श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

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