गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

जगत से नाता छोड़ों और भगवान से नाता जोड़ों-पंडित अभिषेक भारद्वाज




सीहोर। दो नावों पर सवार होकर चलने वाला मनुष्य कभी पार नही होता है। मोह माया के बंधन में फंसने से अच्छा है। भगवान के प्रति अपना मन लगाओ, भगवान भक्त के हृदय में ही विराजते हैं। इसके लिए व्यक्ति को तन से नहीं आत्मा से भगवान की भक्ति करनी होगी उक्त उद्गार सिद्धपुर सेवा समिति के तत्वाधान में श्री मोर गार्डन पटेल मार्केट शुगर फैक्ट्री पर गुरुवार से आरंभ हुई श्रीमद् भागवत कथा में आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित अभिषेक भारद्वाज ने कही। गुरुवार को कथा के प्रारंभ होने से पहले पंचमुखी हनुमान मंदिर से कलश यात्रा आरंभ हुई जिसका स्वागत मुस्लिम धर्म के लोगों के साथ अनेक सामाजिक संगठनों ने किया। कलश यात्रा सद्भाव का प्रतीक बन गई।
भक्तों को कथा का महत्व बताते हुए श्री भारद्वाज ने कहा कि भागवत की महिमा असीम एवं अपार है। भगवान और भक्तों की पावन कथामृत से परिपूर्ण भागवत श्रवण की इच्छा मात्र के जागृत होने से ही भगवान हृदय में विराजमान हो जाते हैं। श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही समस्त पापो का नाश होता है । सद्गति एवं सद्ज्ञान की प्राप्ति होती है। जब मानव के हृदय में भगवान का वास हो जाता है तो मानव पाप रहित हो जाता है क्योंकि हृदय में भगवान के विराजने पर मानव को जीवन का वास्तविक लक्ष्य प्राप्त हो जाता है वह प्रभु भक्ति में लग जाता है। प्रभु नाम के जो रसिक होते है उन के पास धन आए या न आए मान हो या अपमान उन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसकी हार कभी होती ही नहीं वह सब जगह ही विजयी है। दुनियां में आप किसी के अधीन बनो तो वह आप को अपना गुलाम बना लेगा तथा स्वयं बड़ा बन जाएगा। परन्तु यदि आप प्रभु के दास बन जाओ तो प्रभु आप को अपने से बड़ा मान लेंगे। ऐसा मानने की क्षमता केवल भगवान के पास ही है ओर किसी के पास नहीं है। श्री भारद्वाज ने कहा कि अतीत में शिक्षा के साथ संस्कार दिए जाते थे। लेकिन अब विद्यालयों में संस्कार और शिक्षा अलग हो गई है। कथा के पहले दिन बड़ी सं या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। इस संबंध में आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक जारी है।

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