मंगलवार, 30 अप्रैल 2013

पापों के नाश के लिए होता है श्रीराम का अवतार



 सीहोर। जो व्यक्ति राम के नाम का सुमिरन करता है वह भवसागर पार हो जाता है। जब-जब धर्म की हानि होती है, पृथ्वी पर अनाचार, पाप और अत्याचार बढ़ता है। तब भगवान का अवतार होता है और रावण जैसे पापियों को मारकर भक्तों तथा साधु समाज की रक्षा करते हैं। उक्त उद्गार ग्राम अमला मुस्करा में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में मंगलवार को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का वर्णन करते हुए पंडित मोहित पाठक ने कहे। आत्मशांति के साथ समृद्धि भी मिलती है। भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग की विस्तार से व्या या करते हुए पंडित श्री पाठक ने कहा कि  ईश्वर की इच्छा के बिना कुछ नहीं होता। अपने आप को पहचानने की आवश्यकता है। परमात्मा के ध्यान से हीं आत्मज्ञान होता है। जब आत्म ज्ञान आता है तो हमारा कल्याण हो जाता है।

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